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बढ़ते हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर सरकार करने वाली है सख्ती: जानिए क्या है पूरा प्लान?

Health Insurance: केंद्र सरकार लगातार बढ़ते हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर लगाम लगाने के लिए बीमा रेगुलेटर, कंपनियों और अस्पतालों के साथ मिलकर काम कर रही है और सख्त कदम उठाने की तैयारी में है।

प्रिया सिंह

Health Insurance Premiums: पहले सरकार ने हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम पर लगने वाला जीएसटी हटाकर लोगों को राहत दी थी। अब सरकार का ध्यान लगातार बढ़ रहे हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम की तरफ गया है, जिससे आम आदमी की जेब पर ज्यादा बोझ पड़ रहा है। इस समस्या को देखते हुए, सरकार ने अब इस मामले में सीधा दखल देने का फैसला किया है। प्रीमियम की इस बेतहाशा बढ़ोतरी को रोकने के लिए सरकार ने बीमा रेगुलेटर (IRDAI), इंडस्ट्री के बड़े अधिकारियों और हॉस्पिटल ग्रुप्स के साथ बातचीत शुरू कर दी है।

महंगे प्रीमियम पर रोक लगाने की सरकारी तैयारी

हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम जिस तेजी से बढ़ रहा है, उससे आम जनता काफी परेशान है। इस प्रीमियम पर लगाम लगाने के लिए सरकार अब कई कड़े कदम उठाने पर विचार कर रही है।

क्या हैं सरकार के मुख्य प्लान?

  1. प्रीमियम की ऊपरी सीमा (Cap): सरकार बीमा कंपनियों पर एक प्रीमियम की अधिकतम सीमा तय करने का विचार कर रही है ताकि वे मनमाने ढंग से प्रीमियम न बढ़ा सकें।
  2. डिस्क्लोजर नियमों को सख्त करना: बीमा कंपनियों के लिए जानकारी देने के नियमों को और सख्त किया जाएगा, जिससे ग्राहकों को पॉलिसी की पूरी और सही जानकारी मिल सके।
  3. लागत कम करने पर जोर: सरकार चाहती है कि बीमा कंपनियां अपने मैनेजमेंट के खर्चों को कम करें। इसके तहत, एजेंटों को दिए जाने वाले कमीशन की एक सीमा तय की जा सकती है। इससे कंपनियों की लागत घटेगी और इसका फायदा ग्राहकों को कम प्रीमियम के रूप में मिल सकता है।
  4. क्लेम प्रक्रिया में सुधार: क्लेम सेटलमेंट में देरी और गड़बड़ियों को रोकने के लिए, सरकार 'नैशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज' को बढ़ावा दे रही है। इसका लक्ष्य क्लेम के पूरे प्रोसेस को डिजिटल, तेज और आसान बनाना है।
  5. GST कटौती का लाभ: सरकार इस बात पर करीबी से नजर रखे हुए है कि GST में जो कटौती हुई थी, उसका फायदा बीमा कंपनियां पॉलिसीधारकों को दे रही हैं या नहीं।

प्रीमियम महंगा क्यों हो रहा है?

प्रीमियम महंगा होने के पीछे की मुख्य वजह इलाज का तेजी से बढ़ता खर्च है। अस्पतालों में महंगी मशीनों और नई टेक्नॉलजी का इस्तेमाल बढ़ गया है। बीमा कंपनियों का यह भी आरोप है कि कई बार अस्पताल जरूरत से ज्यादा बिल बना देते हैं। इन सब कारणों से बीमा कंपनियों पर क्लेम का बोझ बढ़ता है और वे ग्राहकों से ज्यादा प्रीमियम वसूलती हैं।

दूसरी तरफ अस्पतालों का कहना है कि बीमा कंपनियां क्लेम देने में देरी करती हैं या फिर बिल में बिना वजह कटौती कर देती हैं। इस खींचतान में आम आदमी परेशान होता है, क्योंकि क्लेम के समय उन्हें उम्मीद से कम पैसा मिलता है या फिर सेटलमेंट में बहुत परेशानी होती है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में मेडिकल महंगाई 2026 में 11.5% तक बढ़ने का अनुमान है, जो कि वैश्विक औसत (9.8%) से काफी ज्यादा है। इसीलिए सरकार अब इस पर लगाम लगाने के लिए जल्द ही अंतिम फैसला ले सकती है।

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