Gold Silver Price Drop Today 29 September: सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए राहत भरी खबर है। वैश्विक बाजार में आ रही कमजोरी के असर से भारतीय सराफा बाजार में भी दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। Bullions.co.in के आंकड़ों के अनुसार, 29 सितंबर की सुबह 24 कैरेट सोने का भाव लुढ़ककर 1,47,270 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं, चांदी की कीमतों में भी जोरदार गिरावट आई है और यह 2,27,480 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई है। बीते एक सप्ताह के भीतर सोने में 6,350 रुपये और चांदी में 12,490 रुपये प्रति किलो तक की कमी देखी गई है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो सोना 3.35 फीसदी टूटकर 4,133.94 डॉलर प्रति औंस और चांदी 5.31 फीसदी गिरकर 60.67 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव, कच्चे तेल के दामों में उछाल और अमेरिकी डॉलर तथा ट्रेजरी यील्ड में मजबूती के चलते महंगाई की चिंताएं बढ़ी हैं। यूएस फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के संकेतों से भी निवेशकों का रुझान सोने से हटकर यील्ड देने वाले विकल्पों की ओर बढ़ा है, जिसका सीधा असर कीमतों पर देखने को मिल रहा है।
सोने और चांदी की कीमतों में आज घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी तेज गिरावट देखने को मिली। इंटरनेशनल मार्केट में सोना 3.35% टूटकर 4,133.94 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वहीं चांदी 5.31% गिरकर 60.67 डॉलर प्रति औंस के भाव पर पहुंच गई।
सोने और चांदी पर कई अंतरराष्ट्रीय कारकों का दबाव बना हुआ है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, मजबूत अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी से महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी है। इसका असर कीमती धातुओं की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है।
इसके अलावा ब्याज दरें बढ़ने पर निवेशकों के लिए सोने का आकर्षण कम हो सकता है। इसकी वजह यह है कि सोना कोई ब्याज नहीं देता, जबकि बॉन्ड और दूसरी यील्ड वाली संपत्तियों से रिटर्न मिल सकता है। ऐसे माहौल में निवेशक सोने के बजाय इन विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं।
आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमत में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। बाजार की नजर खास तौर पर डॉलर की चाल, कच्चे तेल की कीमत और दुनिया में चल रही भू-राजनीतिक घटनाओं पर रहेगी। जानकारों के मुताबिक, लंबी अवधि में कीमती धातुओं की कीमत किस दिशा में जाएगी, यह वैश्विक अर्थव्यवस्था और दूसरे बड़े आर्थिक संकेतकों पर निर्भर करेगा।