Why Gold Prices Falling Global Crisis: वैश्विक स्तर पर जारी युद्ध और टेंशन के बीच सोने और चांदी की कीमतें सभी को चौंका रही हैं। आमतौर पर ग्लोबल अनिश्चितता के बीच सोने को सुरक्षित निवेश की तौर पर देखा जाता है, लेकिन मौजूदा समय में भारत से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक सोने और चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स (Comex) पर गोल्ड का भाव टूटकर 4166.40 डॉलर प्रति औंस के लेवल पर आ गया है, जबिक भारतीय बाजारों में भी यह कीमती धातु 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है।
एक तरह दुनिया में अशांति का माहौल बना हुआ है, बावजूद इसके सोने-चांदी की कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट क्यों देखने को मिल रही है। आइए इसके पीछे के मुख्य कारणों को समझते हैं। इंटरनेशनल मार्केट में गोल्ड का ट्रेंड काफी हद तक अमेरिकी डॉलर के प्रदर्शन पर निर्भर रहता है। हाल के दिनों में डॉलर इंडेक्स में मजबूती दर्ज की गई है। जब भी डॉलर मजबूत होता है। तब अन्य देशों की करेंसी का इस्तेमाल करने वाले खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है।
इस वजह से सोने की खरीदारी में वैश्विक स्तर पर कमी आती है और कीमतें गिरने लगती है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई तेजी ने भी सोने की चमक को फीका किया है। जब सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला ब्याज यानी रिटर्न बढ़ता है, तो बड़े स्तर पर निवेशक अपना पैसा सोने से निकालकर बॉन्ड में निवेश करते हैं।
सोने में किसी भी तरह का ब्याज नहीं मिलता, इसलिए ज्यादा रिटर्न देने वाले बॉन्ड निवेशकों के लिए अधिक फायदेमंद और आकर्षक विकल्प बन जाता है। पिछले महीनों के दौरान सोने की कीमतों में एक बड़ी और ऐतिहासिक तेजी देखने को मिली थी।
जब सोने की कीमतें अपने उच्च स्तर पर पहंच गई, तो बडे़ संस्थागत निवेशकों और ट्रेडर्स ने अपने मुनाफे कैश में बदलने के लिए बिकवाली शुरू कर दी। बाजार में अचानक आई इस मुनाफावसूली के दबाव में सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिलने लगी।
वहीं कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी से दुनियाभर में फिर से महंगाई बढ़ने की खतरा नजर आने लगी है। अगर महंगाई बढ़ती है, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व जैसी केंद्रीय बैंक अपनी ब्याज दरों में कटौती करने से बचेंगी और दरें ऊंची रखेंगी।
ब्याज दरें ऊंची रहने संभावना को देखते हुए गैर-ब्याज संपत्ति जैसे कि सोने और चांदी की डिमांड कम हो जाती है। सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपित डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया, जिसमें नाकेबंदी हटाने के बदले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने और न्यूक्लियर वार्ता की बात कही गई थी।
इस नए कूटनीतिक रुख के सामने आते ही कॉमेक्स पर सोना 4,200 डॉलर प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया, जिसने बाजार की अनिश्चितता को और बढ़ा दिया।
घरेलू स्तर पर भारत में भी सोने की डिमांड में हल्की कमी आई है। आने वाले त्योहारों और शादियों के सीजन से ठीक पहले आम ग्राहक कीमतों में और गिरावट की संभावना को देखते हुए संभलकर खरीदारी कर रहे हैं। खुदरा मांग में आई कमी ने भी भारतीय बाजार में सोने की गिरती कीमतों को सहारा देने के बजाय और नीचे ढकेल दिया है।