Global Oil Shortage Crisis News: अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार गंभीर तनाव से गुजर रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने से कई बड़े देशों में स्टॉक का स्तर खतरनाक रूप से नीचे गिर रहा है। व्यापारियों और ऊर्जा विशेषज्ञों के लिए यह स्थिति बड़ी चिंता का कारण बनी हुई है।
सऊदी अरामको के प्रमुख का कहना है कि युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक दुनिया में 2.6 अरब बैरल तेल की भारी कमी दर्ज की गई है। वर्ष 1979 की ईरानी क्रांति के बाद से यह अब तक की सबसे बड़ी वैश्विक सप्लाई रुकावट मानी जा रही है। अगर यह संघर्ष जल्द खत्म नहीं होता है, तो दुनिया भर में ईंधन की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती हैं।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने मार्च 2026 में अपने इमरजेंसी रिजर्व से 400 मिलियन बैरल तेल जारी करने की घोषणा की थी। IEA की स्थापना 1974 के तेल संकट के समय की गई थी। एजेंसी का मुख्य उद्देश्य अरब देशों द्वारा तेल की सप्लाई रोके जाने जैसी स्थिति से निपटना था।
फिलहाल एजेंसियों के पास कुल मिलाकर 1.5 अरब बैरल का स्टॉक उपलब्ध है, जिसमें सरकारी और कमर्शियल दोनों प्रकार के रिजर्व शामिल हैं। हालाकि, IEA कमर्शियल स्टॉक को बाजार में जारी करने का सीधा आदेश रिफाइनरियों को नहीं दे सकता है। इसलिए केवल 0.9 अरब बैरल सरकारी स्टॉक ही इस्तेमाल के योग्य बचता है।
IEA के इमरजेंसी स्टॉक रिलीज प्रोग्राम के तहत दुनिया के प्रमुख औद्योगिक देशों ने अपनी भागीदारी दर्ज कराई है। इस रिलीज प्रक्रिया में सबसे बड़ा योगदान संयुक्त राज्य अमेरिका का है। अमेरिका ने 172.20 मिलियन बैरल तेल रिलीज करने का वादा किया है।
जापान ने 79.80 मिलियन बैरल, कनाडा ने 23.60 मिलियन बैरल और दक्षिण कोरिया ने 22.50 मिलियन बैरल तेल देने का फैसला किया है। इसके अलावा जर्मनी ने 19.50, फ्रांस ने 14.60, यूके ने 14.00, तुर्किये ने 11.70, स्पेन ने 11.60 और इटली ने 10.00 मिलियन बैरल रिलीज करने का वादा किया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, दुनिया में प्रतिदिन 5 मिलियन बैरल तेल की कमी दर्ज की जा रही है। युद्ध से पहले वैश्विक स्तर पर प्रतिदिन 103 मिलियन बैरल तेल की खपत हो रही थी। मौजूदा 2.6 अरब बैरल की कमी दुनिया की लगभग 25 दिनों की पूरी खपत के बराबर है।
अगर खाड़ी क्षेत्र से होने वाली 11 मिलियन बैरल प्रतिदिन की सप्लाई पूरी तरह ठप रहती है, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है। IEA के पास बचा हुआ 0.9 अरब बैरल का सरकारी रिजर्व केवल 180 दिनों की कमी को पूरा कर सकता है। संकट बढ़ने पर अतिरिक्त रिजर्व जारी करने की योजना बनाई जा रही है।