भू-राजनीतिक ध्रुवीकरण के कारण तेजी से बदल रहे हैं वैश्विक हालात।
कच्चे तेल से मेटल, इलेक्ट्रॉनिक्स, फूड जैसे सेक्टर में बढ़ रही महंगाई।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में भारी-भरकम निवेश के मुकाबले रिटर्न नहीं।
Ministry of Finance Growth Strategy: चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में घरेलू सपोर्ट से भारत की ग्रोथ रेट 7.8 प्रतिशत रही, लेकिन तेजी से बदलते वैश्विक माहौल में इस रेट को बनाए रखना आसान नहीं दिख रहा है। वित्त मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में बताया गया कि यह स्थिति पॉलिसी बनाने वालों के लिए काफी चैलेंजिंग है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ऐसी स्थिति में कम लागत में क्वालिटी वाला सामान बनाने के साथ इनोवेशन से ग्रोथ रेट बनी रहेगी। ग्लोबल लेवल पर भारत को कॉम्पिटिशन में बने रहने के लिए प्रशासनिक सुधार के साथ राज्यों की क्षमता में बढ़ोतरी का सुझाव भी मंत्रालय की ओर से दिया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भू-राजनीतिक ध्रुवीकरण के कारण वैश्विक अनिश्चितता काफी तेजी से बदल रहे हैं। सप्लाई चेन में प्रमुख भागीदारी निभाने वाले देश वाले देश इसका गलत तरीके से फायदा उठा रहे हैं, जिससे दुनियाभर में क्रूड ऑयल से लेकर मेटल, इलेक्ट्रॉनिक्स, फूड जैसे सेक्टर में दाम तेजी से बढ़ रहे हैं।
सप्लाई चेन में बार-बार आ रही रुकावट से महंगाई में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इससे इकोनॉमिक ग्रोथ रेट पर भी असर होगा।
विकसित देशों में ब्याज दरें काफी तेजी से बढ़ रही है और उन देशों के बॉन्ड पर बाजार में अधिक रिटर्न मिल रहा है। ऐसे में दूसरे देशों से होने वाले कैपिटल फ्लो पर भी असर पड़ेगा और विदेशी निवेशक भारत के बजाय अपने देशों में निवेशों को प्राथमिकता देंगे।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सेक्टर में ग्लोबल लेवल पर भारी भरकम निवेश तो हो गया, लेकिन उस लेवल पर रिटर्न नहीं मिल रहा है। इससे भी वाह्या पूंजी प्रवाह (via capital flows) में कमी आ सकती है।
वित्त मंत्रालय की ओर से कहा गया कि देश को अपने कारोबारी माहौल में सुधार करने से ज्यादा देश में कम लागत पर क्वालिटी उत्पाद बनाने का माहौल तैयार करने पर जोर देना चाहिए, ताकि भारत ग्लोबल लेवल पर अन्य देशों के साथ कॉम्पिटीशन कर सके।
अभी जो मौजूदा स्थिति है, उनमें केवल प्रतिस्पर्धा करने वाले देश ही सफल हो सकते हैं।हालांकि, भारत की घरेलू स्थिति मजबूत दिख रही है और इसे देखते हुए विदेशी निवेशकों को फिर से वापसी करने की उम्मीद है।
व्यापारिक मोर्चे पर अमेरिका की तरफ से बढ़ते तनाव को भी देश के विकास के लिए चैलेंजिंग बताया गया है। रूस से तेल खरीदने के कारण अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 100 फीसदी टैरिफ जुर्माने के रूप में लगाने का कानून पारित कर चुका है।
चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ रेट 7.3% रहने का अनुमान है। हालांकि, जून तिमाही में दर्ज 7.8 प्रतिशत की ग्रोथ रेट से यह कम है। वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, जून तिमाही की वृद्धि की तेजी 2026-27 की दूसरी तिमाही में भी जारी रही। हालांकि, इसकी रफ्तार कुछ धीमी हुई है।
ई-वे बिल जारी होने और मैन्युफैक्चिरिंग सेक्टर के खरीद प्रबंधक सूचकांक (PMI) में ग्रोथ की रफ्तार में कमी हुई, जबकि अगस्त में नई मांग और रोजगार में मजबूती से सर्विस सेक्टर की गतिविधियों में सुधार हुआ।
सितंबर महीने में क्रूड ऑयल की कीमतों में काफी तेजी रही। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPSC) के अनुसार, सितंबर में भारतीय कच्चे तेल की बास्केट का औसत 116.04 डॉलर प्रति बैरल रहा, जबकि अगस्त में यह 90.19 डॉलर प्रति बैरल था।
यह एक महीने में 25.85 डॉलर प्रति बैरल की ग्रोथ है। 29 सितंबर को इंडियन बास्केट भी 116.52 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था।