Highlights:
साल की शुरुआत से अब तक सोने-चांदी की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया।
धनतेरस पर 10 ग्राम 24 CT सोने के दाम 3,106 रुपये घटकर 1.41 लाख रुपये पर रहा।
वहीं, एक किलो चांदी का भाव 5,437 रुपये गिरकर 1.81 लाख रुपये पर पहुंच गया।
Why Gold-Silver Price Fall on Dhanteras 2026: इस साल की शुरुआत से लेकर अब (6 नवंबर, 2026) तक सोने और चांदी की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, आज धनतेरस के मौके पर 10 ग्राम 24 कैरेट सोने के दाम 3,106 रुपये घटकर करीब 1.41 लाख रुपये पर कारोबार करता नजर आया।
वहीं, एक किलो चांदी का भाव 5,437 रुपये की गिरावट के बाद 1.81 लाख रुपये पर आ गई है। इससे एक दिन पहले सोना 1.44 लाख और चांदी 1.87 लाख रुपये पर थी। चांदी इस साल चांदी 49 हजार रुपए सस्ती हुई है। ऐसे में लोगों का सवाल है कि हर साल धनतेरस पर महंगा रहने वाला सोना चांदी इस बार सस्ता क्यों? जानते हैं 5 बड़ी वजहें।
वैश्विक स्तर पर आर्थिक और राजनीतिक घटनाक्रमों के चलते अंतरराष्ट्रीय बुलियन बाजार में सोने-चांदी के दामों में करेक्शन (गिरावट) देखने को मिला है। जिसका भारतीय बाजारों में भी देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार यानी Comex पर आज सोना-चांदी फिर सस्ते हो गए हैं। गुरुवार को कीमतों में उछाल के बाद आज फिर कीमतें धड़ाम हुई है।
Comex पर सोने में 1.31 फीसदी तक की गिरावट आई और यह 4059.90 डॉलर प्रति औस पर ट्रेड करता दिखा। वहीं, चांदी के दाम 1.41 प्रतिशत तक गिर गए और ऐसे में कीमत 51.640 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करती दिखी।
अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में बदलाव तथा अमेरिकी राजनीतिक स्थिति का असर दुनियाभर की करेंसी और कमोडिटी मार्केट पर पड़ा है, जिससे सोना-चांदी के भाव नीचे आए हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर इंडेक्स बढ़ता है (यानी डॉलर मजबूत होता है), तो दुनिया भर में सोने और चांदी की वैश्विक कीमतें (जो डॉलर में तय होती हैं) आमतौर पर नीचे आ जाती हैं।
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मजबूत डॉलर की वजह से अन्य मुद्राओं वाले निवेशकों के लिए सोना-चांदी महंगा हो जाता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनकी मांग घटती है और भाव गिर जाते हैं।
पिछले कुछ समय में सोने और चांदी के दाम अपने रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गए थे। ऐसे में ऊंचे स्तर पर निवेशकों और बड़े ट्रेडर्स द्वारा मुनाफावसूली करने से कीमतों पर दबाव बना और दाम गिरे। मुनाफावसूली का मतलब होता है जब निवेशक या ट्रेडर पहले कम कीमत पर खरीदे गए सोना-चांदी को, कीमतें बढ़ने के बाद अपना मुनाफा सुरक्षित करने के लिए बेचना शुरू कर देते हैं।
जब बाजार में बहुत से निवेशक एक साथ अपने शेयर, सोना या चांदी बेचते हैं, तो बाजार में उसकी आपूर्ति अचानक बढ़ जाती है। अर्थशास्त्र के नियम के अनुसार, जब किसी चीज की सप्लाई मांग से ज्यादा हो जाती है, तो उसकी कीमत अपने आप घटने लगती है।
भारतीय रुपये के उतार-चढ़ाव और घरेलू लेवल पर डिमांड-सप्लाई के संतुलन ने भी वायदा बाजार (MCX) में सोने और चांदी के कॉन्ट्रैक्ट की कीमतों में नरमी ला दी है। भारत सोने और चांदी के आयात पर निर्भर है। मई 2026 में सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% (10% बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5% AIDC) कर दिया था।
इस बढ़े हुए टैक्स और डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर (लगभग 96.78 प्रति डॉलर के आसपास) होने से इंपोर्ट काफी महंगा हो गया है। जब वैश्विक बाजार में कीमतें गिरती हैं, तो यह वैश्विक गिरावट कभी-कभी बढ़े हुए टैक्स और रुपये के असर पर भारी पड़ती है, जिससे पिछले कुछ दिनों में MCX और सर्राफा बाजारों में वायदा और हाजिर भाव टूटते नजर आए हैं।
इस बार सोने और चांदी में ऊंचे दामों के बाद आई आंशिक गिरावट से खरीदारों को राहत मिली है, हालांकि ग्राहक भारी गहनों की बजाय हल्के वजन के आभूषण और छोटे सिक्के ज्यादा पसंद कर रहे हैं, जिससे बाजार की मांग और मूल्य तय करने के तरीके में बदलाव आया है। यही कारण हैं कि इस बार भाव को लेकर ट्रेंड बदला है।
कल्याण ज्वैलर्स के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर रमेश कल्याणरमन के अनुसार, धनतेरस पर 22 कैरेट सोने की कीमतें ₹235 प्रति ग्राम गिरकर, पिछले दिन के ₹13,385 से ₹13,150 हो गईं।