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केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड पर एक्शन लिया है।
रेगुलेटर ने कंपनी द्वारा गुमराह करने वाले विज्ञापन लिए ₹1 लाख का जुर्माना लगाया है।
विज्ञापन में 100% गेंहू का दावा किया गया था, जबकि प्रोडक्ट में 62% बताई गई थी।
Central Consumer Protection Authority on Briatania Bread: केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड पर सख्त एक्शन लिया है। जानकारी के मुताबिक, कंपनी द्वारा गुमराह करने वाले विज्ञापन लिए 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। कंपनी के विज्ञापन में '100 फीसदी गेंहू ब्रेड' का दावा किया गया था, जबकि प्रोडक्ट में गेहूं की मात्रा केवल 62 प्रतिशत बताई गई थी।
22 अक्टूबर के अपने ऑर्डर में केंद्रीय उभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण की चीफ कमिश्नर निधि खरे ने कंपनी को सोशल मीडिया समेत सभी प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर तुरंत विज्ञापन बंद करने का निर्देश दिया है।
ब्रिटानिया को 15 दिनों के अंदर कम्प्लायंस रिपोर्ट जमा करने के लिए भी कहा गया है। रेगुलेटर ने इस मामले का खुद संज्ञान लिया, जब उसने देखा कि प्रोडक्ट की पैकेजिंग पर 62 प्रतिशत गेहूं बताया गया था, जबकि उसके विज्ञापन में '1000 फीसदी गेहूं का दावा किया गया था।
सीसीपीए ने अपने आदेश में कहा है कि मौजूदा मामले में प्रोडक्ट में केवल 62% पूर्ण गेहूं है, जबकि बाकी 38 प्रतिशत में चावल की भूसी और दूसरी चीजें शामिल हैं। इसमें यह भी कहा गया कि '100 प्रतिशत से शुरू किया गया दावा पहली नजर में गुमराह करने वाला था, क्योंकि इससे ऐसा लगता है कि प्रोडक्ट पूरी तरह से संपूर्ण गेहूं से बना है।
जांच के दौरान कंपनी ने माना कि उसकी '100% होल व्हीट ब्रेड' में केवल 62 प्रतिशत गेहूं का आटा था। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने देखा कि कंपनी ने फिर भी इस दावे का इस्तेमाल करके खुलेआम ग्राहकों को धोखा दिया।
रेगुलेटर ने यह भी बताया कि खाद्य सुरक्षा और मानक (विज्ञापन और दावे) विनियम, 2018 में 'होल व्हीट' शब्द से पहले '100%' प्रीफिक्स इस्तेमाल करने का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए, किसी प्रोडक्ट को '100% होल व्हीट' बताना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत गुमराह करने वाला है।
कंपनी की इस सफाई को खारिज करते हुए कि दावे सिर्फ अच्छी बातें बताने के लिए थे, CCPA ने इसे सही नहीं बताया और कहा कि वह ऐसे बयान को सही नहीं ठहरा सकता जिससे ग्राहकों को धोखा मिलने की संभावना हो।
सीसीपीए ने अपने आदेश में कहा कि कंपनी की ओर से किए गए दावे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत गुमराह करने वाले विज्ञापन और गलत ट्रेड प्रैक्टिकस करार दिया।