Bombay Coated & Special Steels Ltd IPO Review: घरेलू उपकरण बनाने वाली कंपनियों की जरूरतों के मुताबिक स्टील कॉयल से उत्पाद तैयार कर उनकी आपूर्ति करने वाली महाराष्ट्र स्थित बॉम्बे कोटेड एंड स्पेशल स्टील लिमिटेड आईपीओ के जरिए पूंजी बाजार से करीब 183 करोड़ रुपये जुटाने जा रही है। कंपनी का आईपीओ 29 अक्टूबर से 2 नवंबर 2026 तक खुला रहेगा।
इसके लिए 10 रुपये फेस वैल्यू वाले शेयर का प्राइस बैंड 76 से 82 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। कंपनी के शेयर बीएसई और एनएसई में 5 नवंबर को होने की उम्मीद है।
यह पूरी तरह फ्रेश इश्यू है। कंपनी की योजना इश्यू से मिलने वाली रकम में से 125 करोड़ रुपये पुराने कर्ज के भुगतान और करीब 15.7 करोड़ रुपये लीज व्यवस्था के तहत मशीनरी एवं उपकरण हासिल करने पर खर्च करने की है। शेष राशि का इस्तेमाल अन्य सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।
स्टील कॉयल कंपनी के कारोबार का प्रमुख कच्चा माल है। हाल के दिनों में वैश्विक बाजार में स्टील की कीमतों में बढ़ोतरी से कंपनी की कच्चे माल की लागत बढ़ी है। कंपनी के अनुसार, लागत में यह वृद्धि आगे भी जारी रह सकती है। दूसरी ओर, कंपनी पिछले तीन वर्षों में औसतन करीब 2.5 प्रतिशत के शुद्ध मुनाफा मार्जिन पर कारोबार कर रही है, जो काफी कम है।
ऐसे में यदि कंपनी बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ ग्राहकों पर डालने में सफल नहीं होती है, तो आने वाली तिमाहियों में उसके मुनाफे और मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनी बढ़ती लागत के बीच अपने मुनाफे को किस हद तक बनाए रख पाती है।
कंपनी के DRHP में सितंबर 2025 तक की छह महीने की अवधि के लिए स्टील कॉयल की खरीद में JSW Steel Coated Products की हिस्सेदारी लगभग 84% बताई गई थी। इसी अवधि से संबंधित दस्तावेजी आंकड़ों में शीर्ष 10 ग्राहकों से करीब 68% राजस्व मिलने की जानकारी भी दी गई है।
प्रमुख सप्लायर पर अधिक निर्भरता से खरीद लागत और आपूर्ति की शर्तों में बदलाव का जोखिम बढ़ सकता है। दूसरी ओर, कुछ बड़े ग्राहकों के ऑर्डर घटाने या भुगतान में देरी करने से बिक्री और नकदी प्रवाह प्रभावित हो सकते हैं।
कंपनी की उत्पादन क्षमता का उपयोग करीब 65 प्रतिशत ही है। यानी मौजूदा क्षमता का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा अभी इस्तेमाल नहीं हो रहा है। ऐसे में आईपीओ से जुटाई गई रकम से मशीनरी एवं उपकरण हासिल करने की योजना पर सवाल उठता है कि क्या कंपनी को उत्पादन क्षमता बढ़ाने की जरूरत है या पहले मौजूदा क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करना अधिक जरूरी है?
कंपनी ने किसी भी ग्राहक के साथ दीर्घकालिक सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट नहीं किया है। ऐसे में कंपनी के पास भविष्य के ऑर्डर और बिक्री को लेकर सुनिश्चितता सीमित रहती है। ग्राहकों की मांग में कमी या ऑर्डर मिलने में उतार-चढ़ाव का असर कंपनी के कारोबार पर पड़ सकता है।
कंपनी के DRHP के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों के दौरान PF, ESIC, TDS और GST जैसे टैक्स दायित्वों के भुगतानों में बार-बार देरी हुई है। यह स्थिति कंपनी की कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) के प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े करती है। साथ ही, समय पर वैधानिक देनदारियों का भुगतान न कर पाना कंपनी की वित्तीय अनुशासन व्यवस्था और कॉरपोरेट गवर्नेंस के लिहाज से भी चिंता का विषय है।
कंपनी के आईपीओ का एक बड़ा उद्देश्य कर्ज का भुगतान करना है। कंपनी 125 करोड़ रुपये कर्ज चुकाने की योजना बना रही है, जिससे सालाना करीब 12 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है। इससे कंपनी के ब्याज खर्च में कमी आ सकती है और शुद्ध मुनाफा मार्जिन मौजूदा करीब 2.4 प्रतिशत से बढ़कर 3.3 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। कर्ज घटने से बैलेंस शीट को मजबूती मिल सकती है, जबकि पिछले वर्षों में बिक्री में लगातार वृद्धि कंपनी के लिए सकारात्मक संकेत है।
हालांकि, दूसरी ओर कंपनी का सीमित शुद्ध मुनाफा मार्जिन, कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, घरेलू उपकरण निर्माताओं और बड़े ग्राहकों पर निर्भरता, उत्पादन क्षमता का महज 65 प्रतिशत उपयोग तथा PF, ESIC, TDS और GST जैसे वैधानिक भुगतानों में देरी चिंता के विषय हैं।
ऐसे में कर्ज का बोझ घटने से कंपनी की वित्तीय स्थिति में सुधार तो हो सकता है, लेकिन क्या इससे कारोबार की बुनियादी चुनौतियां भी दूर होंगी? बिक्री में वृद्धि को टिकाऊ मुनाफे में बदल पाना, उत्पादन क्षमता का बेहतर उपयोग करना और नकदी प्रवाह में सुधार करना कंपनी के भविष्य की दिशा तय करेगा।
अंततः निवेशकों के लिए अहम सवाल यही है कि क्या कर्ज में कमी कंपनी की वित्तीय सेहत को स्थायी रूप से मजबूत कर पाएगी या इसका असर केवल ब्याज खर्च तक सीमित रहेगा। आंशिक रूप से कर्ज में कमी होना से कंपनी का भविष्य बदलेगा या नहीं, ये भविष्य ही बताएगा।
| इश्यू विवरण | जानकारी |
| इश्यू खुलने की तारीख | 29 अक्टूबर 2026 |
| इश्यू बंद होने की तारीख | 2 नवंबर 2026 |
| प्राइस बैंड (₹) | 78-82 |
| इश्यू का कुल आकार (₹ करोड़) | 255 (अपर प्राइस बैंड पर) |
| फ्रेश इश्यू (₹ करोड़) | 183 |
| इश्यू में शेयरों की संख्या | 2,23,24,024 |
| फेस वैल्यू (प्रति शेयर) | 10 |
| इश्यू के बाद मार्केट कैप (₹ करोड़) | 515.16 (अपर प्राइस बैंड पर) |
| बुक रनिंग लीड मैनेजर (BRLM) | स्मार्ट होराइजन कैपिटल एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड |
| रजिस्ट्रार | KFin Technologies Ltd. |
| लॉट साइज | 182 शेयर और उसके गुणक में |
| योग्य संस्थागत निवेशक (QIB) | 50% |
| रिटेल निवेशक | 35% |
| गैर-संस्थागत निवेशक (NII) | 15% |
| इश्यू से प्राप्त राशि का उपयोग | अनुमानित राशि (₹ करोड़) |
| कंपनी द्वारा लिए गए कुछ कर्जों का पूर्ण या आंशिक पुनर्भुगतान करना या समय से पहले चुकाना | 125 |
| Siemens Financial Services Pvt. Ltd. के साथ मौजूदा लीज व्यवस्था के तहत कैपिटल इक्विपमेंट के अधिग्रहण की लागत का वित्तपोषण | 15.77 |
| सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए (अधिकतम 25%) | — |
| कंपनी के वित्तीय परिणाम (राशि ₹ करोड़ में) | 30-Jun-26 | 31-Mar-26 | 31-Mar-25 | 31-Mar-24 |
| कुल परिसंपत्तियां (Assets) | 526.11 | 571.47 | 458.21 | 350.21 |
| कुल आय (Total Income) | 397.55 | 1,269.83 | 1,058.65 | 765.41 |
| कर पश्चात लाभ (PAT) | 15.08 | 30.54 | 28.67 | 21.14 |
| EBITDA (ब्याज, कर, मूल्यह्रास एवं परिशोधन से पहले की कमाई) | 32.17 | 86.09 | 74.09 | 49.17 |
| नेटवर्थ (Net Worth) | 136.62 | 121.58 | 83.05 | 54.36 |
| रिजर्व एवं सरप्लस | 96.12 | 81.08 | 73.15 | 44.46 |
| कुल उधारी (Total Borrowing) | 273.69 | 338.45 | 276.96 | 234.16 |
| शेयरहोल्डिंग पैटर्न (हिस्सेदारी का विवरण) | ||
| श्रेणी | IPO से पहले | IPO के बाद |
| प्रमोटर एवं प्रमोटर समूह | 97.78% | 63.03% |
| सार्वजनिक शेयरधारक | 2.22% | 36.97% |
| कुल | 100.00% | 100.00% |
| IPO मूल्यांकन | ||
| EPS और P/E Ratio | IPO से पहले | IPO के बाद |
| प्रति शेयर आय (EPS) | ₹ 7.54 | ₹ 9.60 |
| प्राइस-टू-अर्निंग अनुपात (P/E) | 10.88 | 8.54 |
| ऑफर प्राइस पर बाजार पूंजीकरण (₹ करोड़) | 332.10 | 515.16 |