बैंक लॉकर से जुड़े नियम (सोर्स-सोशल मीडिया) 
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Bank Locker से सामान चोरी होने पर क्या हैं नियम? जानें मुआवजे और शिकायत की पूरी प्रक्रिया

Locker Theft Rules: बैंक लॉकर से सामान चोरी होने पर ग्राहक RBI नियमों के तहत बैंक से सालाना किराए का 100 गुना तक मुआवजा पा सकते हैं, बशर्ते बैंक की लापरवाही या धोखाधड़ी साबित हो जाए।

प्रिया सिंह

Bank Locker Compensation Rules In India: सुरक्षित भविष्य के लिए लोग अपने कीमती गहने और दस्तावेज बैंक लॉकर में रखते हैं। RBI ने बैंक लॉकर की सुरक्षा के लिए बहुत सख्त और स्पष्ट नियम बनाए हैं। अगर लॉकर से सामान चोरी हो जाए तो मुआवजा पाने की प्रक्रिया जानना जरूरी है।

बैंक लॉकर की सुविधा

बैंक लॉकर एक बहुत मजबूत धातु का बना हुआ सुरक्षित बॉक्स होता है। इसे बैंक के सबसे सुरक्षित स्ट्रॉन्ग रूम या वॉल्ट के अंदर रखा जाता है। ग्राहक एक निर्धारित शुल्क देकर अपनी ज्वेलरी और दस्तावेज यहां सुरक्षित रख सकते हैं।

सुरक्षा और एक्सेस सिस्टम

इन लॉकरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ड्यूल-की सिस्टम का उपयोग होता है। लॉकर तक पहुंच केवल ग्राहक या उसके द्वारा अधिकृत व्यक्ति को ही दी जाती है। कुछ आधुनिक बैंक अब ग्राहकों की सुरक्षा के लिए डिजिटल एक्सेस की व्यवस्था देते हैं।

चोरी होने पर जरूरी कदम

अगर लॉकर से सामान चोरी हो जाए तो तुरंत लिखित शिकायत दर्ज कराएं। इसके बाद नजदीकी पुलिस स्टेशन जाकर FIR दर्ज कराना बहुत जरूरी होता है। यह FIR भविष्य में मुआवजे और बीमा क्लेम के लिए कानूनी दस्तावेज बनेगा।

RBI मुआवजे के नियम

RBI के नियम कहते हैं कि चोरी पर बैंक की जिम्मेदारी तय होगी। अगर चोरी बैंक की लापरवाही से हुई तो आपको भारी मुआवजा मिल सकता है। ऐसी स्थिति में बैंक को सालाना किराए का 100 गुना मुआवजा देना होगा।

बैंक की लापरवाही के मानक

बैंक की लापरवाही में सुरक्षा चूक या कर्मचारी की धोखाधड़ी शामिल होती है। सुरक्षा सिस्टम में खामी पाए जाने पर बैंक मुआवजे से बच नहीं सकता है। RBI की ये गाइडलाइंस विशेष रूप से ग्राहकों के हितों की रक्षा करती हैं।

प्राकृतिक आपदाओं में जिम्मेदारी

अगर सामान प्राकृतिक आपदा जैसे भूकंप या बाढ़ से खराब होता है। ऐसी स्थिति में बैंक की जिम्मेदारी नियमों के अनुसार काफी सीमित होती है। इसलिए कीमती सामान का बीमा कराना एक बहुत ही समझदारी भरा फैसला है।

सामान क्षतिग्रस्त होने पर

अगर बैंक की संरचनात्मक समस्या के कारण लॉकर का सामान क्षतिग्रस्त होता है। ऐसी स्थिति में वॉल्ट के खराब रख-रखाव के लिए बैंक को जिम्मेदार ठहराएंगे। एक मामले में लॉकर में रखे 18 लाख के नोट पाउडर बन गए थे।

बीमा और अन्य विकल्प

कई बैंक अब अपने लॉकर के सामान के लिए बीमा कवर भी देते हैं। अगर आपका लॉकर बीमा के तहत है तो आप कंपनी से क्लेम कर सकते हैं। बीमा होने से अप्रत्याशित नुकसान की पूरी भरपाई बहुत आसानी से हो जाती है।

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