भाविश अग्रवाल, (सीईओ और फाउंडर, ओला) 
बिज़नेस

OLA सीईओ भाविश अग्रवाल की बढ़ी मुश्किलें! अरेस्ट वारंट जारी, जानें किस मामले में फंस गए ओला के मालिक

Bhavish Aggarwal News: अब तक अपने इलेक्ट्रिक स्कूटरों में लग रही आग से जूझ रहे कंपनी के सीईओ और फाउंडर भाविश अग्रवाल के खिलाफ एक और ताजा मामला सामने आया है। अब उनके खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी हुई है।

मनोज आर्या

Bhavish Aggarwal Arrest Warrant News: देश की प्रमुख इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर निर्माता कंपनी ओला इलेक्ट्रिक (Ola Electric) की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। अब तक अपने इलेक्ट्रिक स्कूटरों में लग रही आग से जूझ रहे कंपनी के सीईओ और फाउंडर भाविश अग्रवाल के खिलाफ एक और ताजा मामला सामने आया है। गोवा की उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग यानी कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन ने ओला इलेक्ट्रिक से जुड़े एक मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए गिरफ्तारी वांरट जारी किया है।

यह मामला प्रीतिश चंद्रकांत घाड़ी की शिकायत से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि उनकी खरीदी गई इलेक्ट्रिक बाइक मरम्मत के लिए ओला को दी गई थी, लेकिन अब उसका कोई अता पता नहीं है। हैरानी की बात यह है कि बाइक की पूरी कीमत पहले ही ओला को चुका दी गई थी, इसके बावजूद यूजर को न तो बाइक मिली और न ही कोई संतोषजनक जवाब।

क्या है पूरा मामला?

इस मामले में शिकायतकर्ता प्रीतिश चंद्रकांत घाड़ी ने बताया कि उन्होंने ओला इलेक्ट्रिक टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड से इलेक्ट्रिक बाइक खरीदी थी। कुछ समय बाद बाइक में तकनीकी दिक्कत सामने आने लगी। जिसके बाद उन्होंने बाइक की रिपेयरिंग के लिए उसे ओला को सौंप दिया। लंबा समय बीत जाने के बाद भी बाइक न तो ठीक होकर लौटी और न ही कंपनी यह बता पाई कि बाइक फिलहाल कहां है।

कंपनी पर लापरवाही का आरोप

गोवा की कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन ने 4 फरवरी 2026 को जारी अपने आदेश में कहा कि ओला ने उपभोक्ता से पूरी कीमत वसूलने के बाद बेहद लापरवाह रवैया अपनाया है। आयोग ने माना कि कंपनी का उपभोक्ता के प्रति व्यवहार गैर-जिम्मेदाराना और उदासीन है। इसी वजह से आयोग ने ओला इलेक्ट्रिक के CEO और फाउंडर भाविश अग्रवाल (Bhavish Aggarwal) को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया, ताकि वह बाइक के बारे में स्पष्ट जानकारी दे सकें और यह भी बताएं कि इतनी देर से बाइक की मरम्मत और डिलीवरी क्यों नहीं की गई।

पेश न होने पर अरेस्ट वारंट

आयोग के आदेश के बावजूद जब भाविश अग्रवाल पेश नहीं हुए, तो आयोग ने सख्त कदम उठाते हुए बेंगलुरु पुलिस को उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी करने का निर्देश दिया है। आदेश के अनुसार, 1,47,499 रुपये की राशि का जमानती वारंट एक समान जमानत के साथ जारी किया गया है। यह वारंट कोरमंगला, बेंगलुरु स्थित पते पर संबंधित पुलिस थाने के जरिए तामील कराने को कहा गया है।

आयोग ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए 23 फरवरी 2026 को सुबह 10.30 बजे तय किया है। इस दिन CEO और फाउंडर भाविष अग्रवाल को खुद हाजिर होना होगा। जिसके बाद आयोग उनका स्पष्टीकरण और मौखिक अंतिम दलीलें सुनेगा। यह मामला अब न सिर्फ उपभोक्ता अधिकारों बल्कि बड़ी कंपनियों की जवाबदेही को लेकर भी अहम माना जा रहा है।

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