पटना: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले ही राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। बिहार के जाने माने नेता और दलितों के मसीहा श्याम रजक ने राष्ट्रीय जनता दल का साथ छोड़ दिया। इसी के साथ राम-श्याम की जोड़ी RJD से अलग हो गई। लालू यादव के कार्यकाल में राम-श्याम की जोड़ी काफी फेमस थी। किसी भी बड़े निर्णय के लिए इनकी राय काफी मायने रखती थी।
यहां हम राम यानी की राम कृपाल यादव और श्याम यानी की श्याम रजक की बात कर रहे हैं। राम-श्याम को लालू यादव का राइट और लेफ्ट हैंड माना जाता था, लेकिन आज ये दोनों उनसे अलग हो गए। इसी के साथ एक बार फिर श्याम रजक के JDU में शामिल होने पर चर्चा तेज हो गई है। इस दौरान श्याम रजक को भी नीतीश कुमार की तारीफ करते सुना गया। हालांकि उन्होंने जेडीयू में शामिल होने पर कोई प्रतिक्रया नहीं दी है।
श्याम रजक ने RJD के राष्ट्रीय महासचिव पद से भी इस्तीफा दिया। उन्होंने आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को इस्तीफा भेजते हुए दो पंक्तियों में अपना दर्द बयां किया। उन्होंने लिखा 'मैं शतरंज का शौकिन नहीं था, इसलिए धोखा मिला। आप मोहरे चल रहे थे, मैं रिश्तेदारी निभा रहा था।' मिल रही जानकारी के मुताबिक वो लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव के नेतृत्व से खुश नहीं थे, जिसके कारण उन्होंने यह फैसला लिया। इससे पहले भी उन्होंने एक बार पार्टी का साथ छोड़ा था। अब दूसरी बार उन्होंने आरजेडी से अलग होने का फैसला लिया है। श्याम रजक अगर जेडीयू में शामिल होने का फैसला लेते हैं तो वो भी दूसरी बार होगा। उन्होंने 2020 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले नीतीश कुमार का साथ छोड़ा लालू यादव का साथ दिया था। इस बार स्थिति बिल्कुल विपरीत है। माना जा रहा है किसी भी वक्त श्याम रजक एक बार फिर नीतीश कुमार की पार्टी में शामिल हो सकते हैं।
श्याम रजक बिहार के सबसे होशियार नेताओं में जाना जाता हैं। इसके बाद भी उनको आरजेडी से कई बार धोखा मिला। सबसे पहले तब जब उन्होंने 2020 विधानसभा चुनाव से पहले जेडीयू से इस्तीफा देकर फुलवारी सीट से लड़ने के लिए आरजेडी का दामन थामा था। आरजेडी ने इस सीट से मुन्नी रजक को टिकट दिया।
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इसके बाद उम्मीद थी को वो विधान परिषद के चुनाव में उतर सकते हैं, लेकिन यहां भी धोखा मिला। हद तो तब हो गई जब लोकसभा चुनाव में आरजेडी ने समस्तीपुर या जमुई से टिकट की उनकी मांग को अनसुना कर दिया। जिसके बाद श्याम रजक ने अपना फाइनल फैसला लेते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया।
जेडीयू के खिलाफ अपनी करियर की शुरुआत करने वाले इस नेता पर अब नीतीश कुमार कितना भरोसा करते हैं यह आने वाला समय बताएगा। हालांकि ख़बर यह भी है कि इस्तीफा देने से पहले उन्होंने बिहार के सीएम नीतीश कुमार से गुप्त रुप से मुलाकात की थी। जिसकी वजह से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि कुमार ने समर्थन देने की बात कही होगी तभी रजक ने यादव परिवार का साथ छोड़ा है।