तेजस्वी यादव, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
बिहार

तेजस्वी के दो सिपहसालार जिन्होंने हरा दिया चुनाव, एक ने तो परिवार में भी कराई थी कलह!

Bihar Election Result: बिहार चुनाव 2025 में MGB की भारी हार के बाद अंदरूनी कलह तेज। RJD-कांग्रेस नेताओं ने संजय यादव और कृष्णा अल्लावरू को सीट शेयरिंग और रणनीतिक चूकों का जिम्मेदार ठहराया।

अमन उपाध्याय

Bihar Election MGB Result:  बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने महागठबंधन (MGB) के हर समीकरण को उलट दिया। ‘पढ़ाई-कमाई-दवाई’ के नारे के साथ लड़ रही तेजस्वी यादव की टीम को उम्मीद थी कि इस बार जनसमर्थन उन्हें मजबूत बढ़त दिलाएगा। लेकिन नतीजों ने हर अनुमान को ध्वस्त कर दिया।

एनडीए 200 से ज्यादा सीटों पर आगे दिखा, जबकि MGB मुश्किल से 30 सीटों के आसपास सिमटा रहा। हार के तुरंत बाद ही गठबंधन के भीतर उंगलियां उठनी शुरू हो गईं और सबसे अधिक निशाने पर आए दो नाम: RJD के रणनीतिकार संजय यादव और कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरू।

गरमा गया माहौल

मतगणना के दौरान ही माहौल गरमा गया जब कांग्रेस राज्यसभा सांसद अखिलेश सिंह ने मीडिया के सामने कहा कि परिणाम चौंकाने वाले हैं। रैलियों में भीड़ थी लेकिन नतीजे उलट आए। सीट शेयरिंग में देरी और ‘फ्रेंडली फाइट’ ने नुकसान किया। RJD के संजय यादव और हमारी पार्टी के प्रभारी कृष्णा अल्लावरू ही बता सकते हैं कि ऐसा क्यों हुआ। उनके इस बयान ने MGB के भीतर की नाराजगी को सार्वजनिक कर दिया। इसके बाद RJD के veteran नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने भी यही सुर छेड़ा। उन्होंने बिना नाम लिए कहा कि बाहरी सलाहकारों ने इस बार MGB को भारी नुकसान पहुंचाया। बिहार की जमीन को न समझने वाले रणनीतिकारों ने पूरी रणनीति बिगाड़ दी। उनके बयान से साफ संकेत मिला कि उनका इशारा इन्हीं दो सलाहकारों की तरफ था।

कौन हैं संजय यादव?

हरियाणा के रहने वाले संजय यादव 2020 के बाद से तेजस्वी यादव के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार माने जाते हैं। RJD ने उन्हें ‘स्ट्रैटेजिक एडवाइजर’ की भूमिका सौंपी, जहां वे सोशल मीडिया, चुनावी योजनाओं और सीट वितरण में मुख्य भूमिका निभाते रहे। इस बार आरोप है कि उनकी ‘बाहरी सोच’ ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया।

कांग्रेस नेता यह भी आरोप लगा रहे हैं कि संजय यादव ने RJD को अधिक सीटें दिलाने के लिए दबाव बनाया, जिससे गठबंधन के भीतर अविश्वास बढ़ा। इसके साथ ही कई सीटों पर RJD और कांग्रेस के बीच फ्रेंडली फाइट ने 10–15 सीटों का नुकसान किया।

कौन हैं कृष्णा अल्लावरू?

दक्षिण भारत से आने वाले कृष्णा अल्लावरू को 2025 में बिहार कांग्रेस का प्रभारी बनाया गया था। राहुल गांधी की टीम के महत्वपूर्ण सदस्य माने जाने वाले अल्लावरू से उम्मीद थी कि वे संगठन को मजबूत करेंगे। लेकिन कांग्रेस के नेताओं का आरोप है कि उन्होंने MGB के भीतर तालमेल नहीं बैठाया, न ही सीट शेयरिंग विवाद को समय रहते निपटाया।

कांग्रेस 70 सीटें मांग रही थी लेकिन उसे सिर्फ 40 सीटें मिलीं, जिससे असंतोष बढ़ा। अखिलेश सिंह का कहना है कि अल्लावरू ने ‘फ्रेंडली फाइट’ को रोकने में भी उदासीनता दिखाई। बता दें कि बिहार चुनाव में MGB की हार सिर्फ राजनीतिक हार नहीं, बल्कि रणनीतिक असफलता भी बताई जा रही है। हार के बाद इन दो सलाहकारों की भूमिका अब सियासी गलियारों में चर्चा का बड़ा मुद्दा बन चुकी है।

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