कांग्रेस दफ्तर में अध्यक्ष के सामने ही चले लात-घूंसे (फोटो- सोशल मीडिया) 
बिहार

हार पर मंथन में 'हाथापाई'? कांग्रेस दफ्तर में अध्यक्ष के सामने ही चले लात-घूंसे, जानें क्या हुआ

Congress पार्टी के ऑफिस में कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। कहा-सुनी के दौरान एक-दूसरे पर मुक्के और लात भी चलाए। घटना हाल के चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन की समीक्षा के लिए हुई एक मीटिंग के दौरान हुई।

सौरभ शर्मा

Congress Workers Fight News: बिहार में कांग्रेस की कलह अब सड़क पर नहीं, सीधे दफ्तर के अंदर तमाशा बन गई है। मधुबनी में जो हुआ, उसने सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। हार की समीक्षा करने बैठे नेताओं के बीच मंथन की जगह 'दंगल' शुरू हो गया। वो भी तब, जब पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष खुद वहां मौजूद थे। कार्यकर्ताओं का गुस्सा इस कदर फूटा कि लात-घूंसे चलने में देर नहीं लगी। यह नजारा किसी एक्शन फिल्म का नहीं, बल्कि कांग्रेस कार्यालय का था जहां मर्यादा तार-तार हो गई।

बात सिर्फ बहस तक सीमित नहीं रही, बल्कि नौबत मारपीट तक आ गई। जिसे जो हाथ लगा, उसने उसी से हमला बोल दिया। हद तो तब हो गई जब पार्टी के झंडे को ही हथियार बना लिया गया। प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और वरिष्ठ नेता शकील अहमद खान के सामने ही कार्यकर्ता एक-दूसरे पर टूट पड़े। वहां मौजूद समझदार लोगों ने बीच-बचाव की कोशिश जरूर की, लेकिन बेकाबू भीड़ के सामने उनकी एक न चली। देखते ही देखते पूरा माहौल तनावपूर्ण हो गया और बैठक जंग के मैदान में बदल गई।

टिकट बंटवारे का पुराना दर्द

दरअसल, इस पूरे बवाल की जड़ में चुनावी रंजिश और टिकट बंटवारे का विवाद था। बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान टिकट में गड़बड़ी और अनियमितता का आरोप लगाते हुए कांग्रेस के ही दो गुट आमने-सामने आ गए। कार्यकर्ताओं का आरोप था कि वफादारों को दरकिनार किया गया। बस फिर क्या था, संगठन और रणनीति पर चर्चा धरी रह गई और लाठी-डंडे चलने लगे। इससे पहले भी पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते कई नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाया गया था, लेकिन यह गुस्सा अब हिंसा में बदल चुका है, जिसे संभालना अब बड़े नेताओं के लिए भी मुश्किल हो रहा है।

61 सीटों की हार और सुलगते सवाल

बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे कांग्रेस के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रहे। पार्टी ने 61 सीटों पर अपनी किस्मत आजमाई थी, लेकिन जीत सिर्फ 6 सीटों पर मिली। इस करारी हार ने कार्यकर्ताओं के सब्र का बांध तोड़ दिया है। पार्टी के ही कई नेताओं ने टिकट बंटवारे में भेदभाव और उगाही तक के गंभीर आरोप लगाए थे। इसी हताशा और गुस्से का नतीजा मधुबनी में देखने को मिला, जहां मंथन के नाम पर सिर्फ मार-पिटाई हुई। अब सवाल यह है कि जब घर के अंदर ही ऐसी रार मची हो, तो पार्टी आगे की रणनीति कैसे तय करेगी।

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