पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद। इमेज-सोशल मीडिया 
बिहार

IRCTC घोटाला मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में लालू प्रसाद की याचिका पर आज होगी सुनवाई

IRCTC Scam: राऊज एवेन्यू कोर्ट ने लालू, राबड़ी, तेजस्वी के खिलाफ आरोप तय किया था। कोर्ट ने आईपीसी की धारा 428, 120बी और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 13(2) के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया था।

रंजन कुमार

Lalu Yadav News: दिल्ली हाईकोर्ट आज पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव की याचिका पर सुनवाई कर सकता है। उन्होंने याचिका में आईआरसीटीसी होटल घोटाला मामले में उनके और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप तय करने के निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी है। मामला न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा के समक्ष सूचीबद्ध है।

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख ने अपनी याचिका में दावा किया है कि आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी से संबंधित अपराधों के लिए आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं। उनकी आपराधिक पुनरीक्षण याचिका में राउज एवेन्यू कोर्ट के उनके और अन्य परिवार के सदस्यों के खिलाफ आपराधिक आरोप तय करने के आदेश को चुनौती दी गई है।

आरोप तय करने का था आदेश

बता दें, 13 अक्टूबर को दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट ने मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खिलाफ आरोप तय कर दिया था। कोर्ट ने मामले में आईपीसी की धारा 428, 120बी और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 13(2) के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया था।

क्या है पूरा मामला?

CBI के मुताबिक यह मामला 5 जुलाई 2017 को दर्ज किया गया था। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया था कि लालू प्रसाद ने रेल मंत्री रहते हुए मेसर्स सुजाता होटल प्राइवेट लिमिटेड (SHPL) के मालिक विजय कोचर और विनय कोचर समेत अन्य लोगों के साथ मिलकर आईआरसीटीसी के रांची और पुरी स्थित बीएनआर (बंगाल रेलवे नागपुर) होटलों की लीजिंग में अनियमितताएं कीं।

पद के दुरुपयोग का आरोप

केंद्रीय जांच एजेंसी के अनुसा, लालू ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए आईआरसीटीसी के कई अधिकारियों की मिलीभगत से कोचर ब्रदर्स को अनुचित लाभ पहुंचाया है। इसके एवज में पटना स्थित एक कीमती भूमि को कोचर ब्रदर्स ने एक ऐसी कंपनी को बेच दिया, जो लालू प्रसाद के करीबी और राजद से राज्यसभा सदस्य प्रेमचंद गुप्ता से जुड़ी थी। यह जमीन मेसर्स डिलाइट मार्केटिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (DMCPL) के नाम से खरीदी गई थी। इसे बाद में लारा प्रोजेक्ट्स एलएलपी नाम से परिवर्तित कर दिया गया। यह कंपनी लालू परिवार के हित में संचालित की जा रही थी। अंततः इस संपत्ति का नियंत्रण राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के हाथों में चला गया। सीबीआई ने अपनी जांच पूरी करने के बाद लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, प्रेमचंद गुप्ता और 10 अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी।

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