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बिहार में सीट शेयरिंग पर मामला गरम! मांझी ने दिया NDA को अल्टीमेटम, बोले- हमारे लिए करो या मरो

Bihar Assembly Elections: मांझी ने सहयोगी दलों पर दबाव बढ़ाते हुए यह भी कहा कि अगर उनकी मांग के मुताबिक सीटें नहीं मिलीं, तो आगामी बिहार चुनाव में 'हम' पार्टी अकेले 100 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

अभिषेक सिंह

Bihar Politics: बिहार में चुनावी लहर है और एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है! सीट बंटवारे को लेकर चल रहे इस विवाद से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। इधर, केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (हम) सुप्रीमो जीतन राम मांझी कम से कम 15 सीटों की मांग पर अड़े हुए हैं।

मांझी ने भाजपा और जदयू के नेताओं से यहां तक ​​कह दिया है कि वह 15 सीटों की भीख मांग रहे हैं, क्योंकि इस बार उनके लिए करो या मरो की स्थिति है। मांझी ने सहयोगी दलों पर दबाव बढ़ाते हुए यह भी कहा कि अगर उनकी मांग के मुताबिक सीटें नहीं मिलीं, तो आगामी बिहार चुनाव में 'हम' पार्टी अकेले 100 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

क्यों 15 से 20 सीटें मांग रहे मांझी?

'हम' के संरक्षक जीतन राम मांझी ने को पटना में मीडिया से बात करते हुए कहा कि वह एनडीए में अपनी पार्टी के लिए 15 से 20 सीटों की मांग कर रहे हैं। इस मांग के पीछे पार्टी की मान्यता मुख्य कारण है। 'हम' पार्टी पिछले 10 सालों से एक पंजीकृत पार्टी है, अभी तक इसे राज्य स्तरीय राजनीतिक दल की मान्यता नहीं मिली है। मान्यता प्राप्त करने के लिए कम से कम 7-8 विधायक या 6 प्रतिशत वोट होना ज़रूरी है।

NDA नेताओं से मांझी ने की विनती

मांझी ने एनडीए नेताओं से कहा कि कम से कम 'हम' पार्टी को इतनी सीटें तो देनी चाहिए कि उसे बिहार विधानसभा में मान्यता प्राप्त दल का दर्जा मिल जाए। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह एनडीए नेताओं से अपनी पार्टी की मान्यता के लिए विनती कर रहे हैं, इन सीटों पर उनका कोई दावा नहीं है। अगर कम से कम 15 सीटें चुनाव लड़ने के लिए उपलब्ध हों, तभी हम 8-10 सीटें जीतकर मान्यता प्राप्त दल बन पाएंगे।

2020 में 'हम' को मिली थी 7 सीटें

गौरतलब है कि हिंदुस्तान आवाम मोर्चा ने 2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए के साथ गठबंधन करके 7 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। इनमें से मांझी की पार्टी ने 4 सीटें जीती थीं। पार्टी को 0.89 प्रतिशत वोट मिले थे। जीतन राम मांझी 2024 में गया से लोकसभा सांसद चुने गए और नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री भी हैं। हालांकि, उनकी पार्टी अभी तक बिहार में 6 प्रतिशत वोट हासिल करने में कामयाब नहीं हुई है।

दरअसल, चुनाव आयोग से मान्यता मिलने के बाद किसी राजनीतिक दल को कई सुविधाएं मिलती हैं। मान्यता प्राप्त दल का चुनाव चिन्ह स्थायी हो जाता है। साथ ही, चुनाव में अधिकतम 40 स्टार प्रचारक रखने की अनुमति मिल जाती है। इसके अलावा, टीवी और रेडियो पर राजनीतिक प्रसारण के लिए टाइम स्लॉट और मतदाता सूची प्राप्त करने जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं।

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