मांझी ने पूछा- कब बंद कर रहे हैं अपनी दुकान (फोटो- सोशल मीडिया) 
बिहार

खाता भी नहीं खुला और वादा भी भूल गए PK? मांझी ने पूछा- कब बंद कर रहे हैं अपनी दुकान

बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं और इन नतीजों ने सबसे बड़ा झटका देश के जाने-माने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को दिया है। मामले में अब मांझी ने पीके को लपेटे में लेते हुए बड़ी बात कह दी।

सौरभ शर्मा

Jitan Ram Manjhi Taunt on Prashant Kishor: बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं और इन नतीजों ने सबसे बड़ा झटका देश के जाने-माने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को दिया है। पूरे बिहार में पदयात्रा करने और व्यवस्था बदलने का दावा करने वाले प्रशांत किशोर की पार्टी 'जनसुराज' का चुनाव में खाता तक नहीं खुल सका। इस करारी हार के बाद अब केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने पीके पर करारा हमला बोला है। मांझी ने प्रशांत किशोर को उनका वह पुराना वादा याद दिलाया है जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर बेहतर प्रदर्शन नहीं किया तो वे अपनी पार्टी बंद कर देंगे और संन्यास ले लेंगे।

चुनाव से पहले प्रशांत किशोर ने बड़े-बड़े दावे किए थे। उन्होंने कहा था कि उनकी पार्टी बिहार में एक नया विकल्प बनेगी और पारंपरिक पार्टियों का सूपड़ा साफ कर देगी। लेकिन जब नतीजे आए तो जनसुराज के उम्मीदवार अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए। जीतन राम मांझी ने इसी बात को पकड़ते हुए तंज कसा है। उन्होंने कहा कि दूसरों के लिए रणनीति बनाना और खुद मैदान में उतरकर जनता का विश्वास जीतना दो अलग बातें हैं। मांझी ने साफ कहा कि बिहार की जनता ने दिखावे की राजनीति को खारिज कर दिया है और जमीन से जुड़े नेताओं पर ही भरोसा जताया है।

बड़े बोल और जमीनी हकीकत का अंतर

जीतन राम मांझी ने तंज कसते हुए कहा कि प्रशांत किशोर ने दावा किया था कि अगर उनकी पार्टी सरकार नहीं बना पाई या बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाई तो वे अपना अभियान समेट लेंगे। अब जब जनसुराज को एक भी सीट नहीं मिली है, तो मांझी पूछ रहे हैं कि वह वादा कब पूरा होगा। मांझी के मुताबिक, राजनीति में विश्वसनीयता सबसे बड़ी पूंजी होती है। उन्होंने कहा कि पीके ने जनता से जो वादा किया था, अब उसे निभाने का वक्त आ गया है, लेकिन हार के बाद से रणनीतिकार के खेमे में सन्नाटा पसरा हुआ है।

रणनीति फेल, अब साख पर सवाल

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी का यह बयान अब सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने कहा कि एसी कमरों में बैठकर गणित लगाने से चुनाव नहीं जीते जाते। बिहार की जनता बहुत समझदार है और उसने बता दिया है कि उसे 'हवा-हवाई' नेता नहीं चाहिए। प्रशांत किशोर ने अपनी पदयात्रा के दौरान मौजूदा सरकार और विपक्ष दोनों को जमकर कोसा था, लेकिन वोटरों ने उनकी ही पार्टी को सिरे से नकार दिया। मांझी के इस हमले के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या प्रशांत किशोर अपने वादे के मुताबिक कोई बड़ा कदम उठाते हैं या फिर चुप्पी साधे रहते हैं। फिलहाल, मांझी के इस तंज ने पीके की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

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