Bihar BJP MLC Resignation: बिहार की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) देवेश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद अब यह चर्चा तेज हो गई है कि खाली हुई सीट पर बिहार सरकार के मंत्री दीपक प्रकाश को मनोनीत किया जा सकता है, जिससे उनकी मंत्री पद की सदस्यता संबंधी संवैधानिक बाधा दूर हो सकती है।
दीपक प्रकाश के मंत्री बने रहने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने बिहार सरकार से पूछा कि यदि दीपक प्रकाश विधानसभा या विधान परिषद, किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं, तो वे मंत्री पद पर कैसे बने हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से इस मामले में जवाब दाखिल करने के लिए 4 अगस्त तक का समय दिया है।
संविधान के प्रावधानों के अनुसार, कोई भी व्यक्ति मंत्री नियुक्त होने के बाद छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना आवश्यक होता है। यदि ऐसा नहीं होता है, तो उसे मंत्री पद छोड़ना पड़ता है। दीपक प्रकाश के मंत्री बने छह महीने पूरे हो चुके हैं और वे अभी तक किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। ऐसे में देवेश कुमार के इस्तीफे को उनकी सदस्यता का रास्ता साफ करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
देवेश कुमार ने शुक्रवार को विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस दौरान बिहार बीजेपी अध्यक्ष संजय सरावगी भी मौजूद रहे। हालांकि, इस्तीफा देने के बाद देवेश कुमार ने मीडिया से कोई बातचीत नहीं की।
देवेश कुमार को 17 मार्च 2021 को राज्यपाल कोटे से विधान परिषद का सदस्य मनोनीत किया गया था। उनका कार्यकाल 16 मार्च 2027 तक था, लेकिन उन्होंने कार्यकाल पूरा होने से पहले ही सदस्यता छोड़ दी। अब इस सीट पर राज्यपाल नए सदस्य का मनोनयन करेंगे। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि इस पद के लिए दीपक प्रकाश का नाम सबसे आगे है।
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यदि दीपक प्रकाश को राज्यपाल कोटे से विधान परिषद का सदस्य मनोनीत किया जाता है, तो उनका कार्यकाल केवल मार्च 2027 तक रहेगा, क्योंकि वे शेष बचा हुआ कार्यकाल ही पूरा करेंगे। ऐसी स्थिति में यदि उन्हें आगे भी मंत्री बने रहना है, तो मार्च 2027 के बाद उन्हें दोबारा किसी सदन की सदस्यता हासिल करनी होगी। फिलहाल राज्यपाल के निर्णय पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।