गिरधारी यादव, नीतीश कुमार (सोर्स- सोशल मीडिया) 
बिहार

नीतीश के दिल्ली जाने से पहले JDU में फूट! सांसद गिरधारी यादव को बाहर निकालने की तैयारी, ओम बिरला को भेजा नोटिस

Bihar Politics: जेडीयू ने सांसद गिरधारी यादव की सदस्यता रद्द करने के लिए लोकसभा स्पीकर को नोटिस सौंपा है। पार्टी विरोधी गतिविधियों और बेटे के आरजेडी में शामिल होने के बाद यह बड़ी कार्रवाई हुई है।

अक्षय साहू

Girdhari Yadav Lok Sabha Disqualification: बिहार में जनता दल यूनाइटेड (JDU) के अंदर बढ़ते मतभेद अब सार्वजनिक हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, जदयू संसदीय दल के नेता दिलेश्वर कामात ने ओम बिरला को एक नोटिस सौंपा है, जिसमें गिरधारी यादव की सदस्यता समाप्त करने (डिसक्वालिफाई) की मांग की गई है। पार्टी का आरोप है कि गिरधारी यादव लगातार पार्टी लाइन के खिलाफ बयानबाजी और गतिविधियों में शामिल रहे हैं।

पार्टी नेतृत्व के अनुसार, गिरधारी यादव ने कई मौकों पर सार्वजनिक तौर पर पार्टी विरोधी बयान दिए, जिससे जदयू की छवि को नुकसान पहुंचा। खासकर SIR जैसे मुद्दों पर उनकी टिप्पणियों को गंभीरता से लिया गया। इसके अलावा, वे बिहार सरकार की नीतियों पर भी कई बार खुलकर आलोचना कर चुके हैं।

गिरधारी यादव ने दी प्रतिक्रिया

गिरधारी यादव का पार्टी से टकराव कोई नया मामला नहीं है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा रही है कि वे धीरे-धीरे पार्टी से दूरी बना रहे थे। इससे पहले भी वे जदयू के आधिकारिक रुख से अलग राय रखते दिखाई दिए हैं। सदस्यता संकट पर गिरधारी यादव ने प्रतिक्रिया दी और कहा, "जब से हम नीतीश कुमार के साथ हैं, पार्टी विरोधी काम नहीं किया है। जब स्पीकर का समन आएगा, तो हम जवाब देंगे।" सियासी हलचल को और बढ़ावा तब मिला जब उनके बेटे चाणक्य यादव बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राष्ट्रीय जनता दल (RJD)  में शामिल हो गए। चाणक्य यादव ने बेलहर सीट से चुनाव भी लड़ा, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद से ही गिरधारी यादव की पार्टी के प्रति निष्ठा पर सवाल उठने लगे थे।

जारी किया गया था कारण बताओ नोटिस

पहले उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था और 15 दिनों के भीतर जवाब देने के लिए कहा गया था। लेकिन अब मामला सिर्फ नोटिस तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सीधे उनकी संसदीय सदस्यता पर खतरे की तलवार लटक गई है। पार्टी ने साफ किया है कि यह कदम अनुशासन बनाए रखने के लिए उठाया गया है और जेडीयू में किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

ओम बिरला के फैसले पर टिकी सबकी नजर

अब सबकी नजर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के फैसले पर टिकी हुई है। यदि नोटिस पर कार्रवाई होती है, तो यह जदयू के भीतर एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जाएगा। वहीं, विपक्षी दल भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि इसका असर बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकता है।

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