Traffic Police Rules: भारत में बाइक या कार चलाते समय ट्रैफिक पुलिस का रोकना कोई असामान्य बात नहीं है। कभी रूटीन चेकिंग तो कभी किसी ट्रैफिक नियम के उल्लंघन पर पुलिसकर्मी वाहन को साइड में लगाने का इशारा करते हैं। ऐसे समय में कई लोग घबरा जाते हैं या गुस्से में पुलिसकर्मी से बहस करने लगते हैं। यही छोटी-सी गलती कई बार मामला शांत करने के बजाय और गंभीर बना सकती है। ऐसे में मोटर वाहन कानून के तहत सड़क पर नियमों का पालन करना हर वाहन चालक की जिम्मेदारी है। इसलिए पुलिस द्वारा रोके जाने पर संयम बनाए रखना और जरूरी दस्तावेज दिखाना सबसे समझदारी वाला कदम होगा।
बताया जाता है कि ट्रैफिक पुलिस के रोकने पर गुस्सा दिखाना या गलत भाषा का इस्तेमाल करना भारी पड़ सकता है। अगर आपको लगता है कि आपने कोई नियम नहीं तोड़ा है तब भी अपनी बात शांत तरीके से रखें। साथ ही ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालना या बदसलूकी करना अलग कानूनी परेशानी खड़ी कर सकता है। जिसका सीधा मतलब है कि चालान को लेकर बहस बढ़ाने के बजाय पहले अधिकारी से कारण पूछें और जरूरत पड़ने पर नियम के आधार पर अपनी बात रखें।
सड़क पर पुलिस को देखकर वाहन भगाना सबसे खतरनाक गलतियों में से एक है। इससे सड़क पर दुर्घटना का जोखिम बढ़ सकता है और पुलिस वाहन नंबर के आधार पर आगे कार्रवाई कर सकती है। ऐसी स्थिति में मामला केवल ट्रैफिक चालान तक सीमित न रहकर अन्य कानूनी धाराओं तक पहुंच सकता है। इसलिए पुलिस के रुकने के संकेत को नजरअंदाज करने के बजाय सुरक्षित जगह पर वाहन रोकना बेहतर विकल्प होता है।
अगर आपके पास ड्राइविंग लाइसेंस, RC या इंश्योरेंस की फिजिकल कॉपी नहीं है तो तुरंत घबराने की जरूरत नहीं है। DigiLocker या mParivahan में उपलब्ध वैध डिजिटल दस्तावेज दिखाए जा सकते हैं। जरूरत पड़ने पर इन्हीं के जरिए दस्तावेजों का वेरिफिकेशन कराया भी जा सकता है।
बताया जाता है कि वाहन जांच के दौरान अपने अधिकारों की जानकारी होना जरूरी है। लेकिन मौके पर अधिकारी की भूमिका और चालान की प्रक्रिया संबंधित नियमों पर निर्भर करती है। अगर आपके दस्तावेज सही हैं और आपको किसी कार्रवाई पर आपत्ति है तो बहस या हाथापाई के बजाय शांतिपूर्वक कारण पूछें और जरूरत पड़ने पर उचित कानूनी या शिकायत प्रक्रिया अपनाएं।