Barapulla Elevated Corridor: दिल्ली-एनसीआर में रोजाना ट्रैफिक जाम से जूझने वाले लोगों के लिए बड़ी राहत की जानकारी सामने आ गई है। बता दें कि खासकर पूर्वी दिल्ली और नोएडा से दक्षिण दिल्ली की तरफ आने-जाने वाले लोगों का सफर जल्द आसान हो सकता है। करीब एक दशक से इंतजार में पड़े बारापुला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर को 29 सितंबर से आम लोगों के लिए खोलने की तैयारी है। इसके शुरू होने के बाद मयूर विहार फेज-1 से सराय काले खां होते हुए एम्स और दक्षिण दिल्ली की ओर जाने वाले यात्रियों को सिग्नल और जाम से काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
बता दें कि बारापुला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर मयूर विहार फेज-1 को सीधे सराय काले खां से जोड़ेगा। सराय काले खां में यह मौजूदा बारापुला कॉरिडोर से जुड़ जाएगा। इसके बाद पूरे कॉरिडोर की लंबाई करीब 9 किलोमीटर हो जाएगी। इस कनेक्टिविटी के शुरू होने से मयूर विहार से एम्स और दक्षिण दिल्ली तक जाने वाला रास्ता काफी हद तक सिग्नल-फ्री हो जाएगा। इसका सबसे बड़ा फायदा रोज ऑफिस, कॉलेज या दूसरे कामों के लिए सफर करने वाले लोगों को मिल सकता है।
अभी के लिए मयूर विहार, पटपड़गंज और त्रिलोकपुरी से दक्षिण दिल्ली जाने वाले वाहन चालकों को कई जगहों पर ट्रैफिक का सामना करना पड़ता है। जिसमें देखा गया है कि सामान्य परिस्थितियों में भी इस सफर में करीब 35 से 40 मिनट लग सकते हैं। ऐसे में नए 3.5 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड स्ट्रेच के शुरू होने के बाद यह समय घटकर करीब 15 मिनट रहने का अनुमान लगाया जा रहा है। इससे रोजाना आने-जाने वालों के समय के साथ ईंधन की भी बचत हो सकती है।
इस प्रोजेक्ट की खासियत सिर्फ इसकी कनेक्टिविटी नहीं है। बताया जा रहा है कि यमुना के बाढ़ क्षेत्र के ऊपर एक्स्ट्राडोज्ड ब्रिज बनाया गया है जिसमें केबल और गर्डर तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसकी स्पैन लंबाई करीब 125 मीटर बताई गई है। वहीं ट्रैफिक को अलग-अलग दिशाओं में सुचारू रखने के लिए कॉरिडोर में आठ लूप बनाए गए हैं। साथ ही मयूर विहार और सराय काले खां दोनों तरफ से वाहनों के चढ़ने-उतरने की व्यवस्था है। साथ ही प्रोजेक्ट में पैदल यात्रियों और साइकिल सवारों के लिए भी अलग व्यवस्था की गई है।
जानकारी के लिए बता दें कि बारापुला फेज-3 को 2014 में मंजूरी मिली थी और इसका निर्माण 2015 में शुरू हुआ। जमीन अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी और यमुना क्षेत्र में निर्माण जैसी चुनौतियों के चलते प्रोजेक्ट में काफी देरी हुई। इसकी शुरुआती लागत करीब 1,260 करोड़ रुपये थी, जो बढ़कर लगभग 1,635 करोड़ रुपये हो गई। वहीं अब कॉरिडोर के शुरू होने से दिल्ली में ट्रैफिक दबाव कम करने और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।