

Nagpur Underground Metro Sadar: नागपुर मेट्रो के फेज-3 में शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में से एक सदर को लेकर बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। महा मेट्रो कस्तूरचंद पार्क से कोराडी के बीच प्रस्तावित 11.5 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर में सदर क्षेत्र के हिस्से को भूमिगत यानी अंडरग्राउंड बनाने और कोराडी रूट पर ड्राइवरलेस मेट्रो चलाने के विकल्प पर विचार कर रही है। हालांकि, दोनों प्रस्ताव अभी अध्ययन के स्तर पर हैं और अंतिम निर्णय विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) के बाद ही लिया जाएगा।
नागपुर जिले में मेट्रो फेज-3 के तहत कस्तूरचंद पार्क से कोराडी तक मेट्रो कनेक्टिविटी विकसित करने की योजना है। इस कॉरिडोर में सदर का हिस्सा तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। क्षेत्र में पहले से फ्लाईओवर और व्यस्त सड़क नेटवर्क मौजूद है। ऐसे में मौजूदा ढांचे को प्रभावित किए बिना नया एलिवेटेड मेट्रो ट्रैक तैयार करना आसान नहीं होगा।
इसी वजह से सदर क्षेत्र में मेट्रो को जमीन के नीचे से ले जाने के विकल्प का अध्ययन किया जा रहा है। प्रस्ताव के अनुसार, अंडरग्राउंड अलाइनमेंट मौजूदा कस्तूरचंद पार्क स्टेशन से शुरू होगा और आगे जाकर एलिवेटेड हिस्से से जुड़ेगा। इस हिस्से में नए भूमिगत मेट्रो स्टेशन के निर्माण का विकल्प भी प्रस्तावित है।
महा मेट्रो ने जुलाई 2026 में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने का काम RITES को सौंपा था। DPR तैयार करने की प्रक्रिया करीब नौ महीने में पूरी होने की उम्मीद है। इसके अनुसार अध्ययन का काम अप्रैल 2027 के आसपास पूरा हो सकता है।
इस रिपोर्ट में कॉरिडोर के तकनीकी पहलुओं, लागत और वित्तीय व्यवहार्यता समेत प्रस्तावित विकल्पों का आकलन किया जाएगा। रिपोर्ट सामने आने के बाद ही सदर में अंडरग्राउंड मेट्रो और कोराडी रूट पर ड्राइवरलेस मेट्रो को लेकर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
फिलहाल दोनों विकल्प प्रस्तावित हैं। यदि इन्हें मंजूरी मिलती है तो नागपुर मेट्रो के फेज-3 में शहर के मौजूदा मेट्रो नेटवर्क की तुलना में तकनीक और निर्माण शैली के लिहाज से महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकता है।
नागपुर मेट्रो के फेज-3 की योजना में केवल अंडरग्राउंड मेट्रो ही नहीं, बल्कि तकनीक के स्तर पर भी बदलाव का विकल्प सामने आया है। कोराडी रूट पर ड्राइवरलेस मेट्रो ट्रेन चलाने की संभावना का भी अध्ययन किया जा रहा है।
हालांकि, इसे अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है। महा मेट्रो तकनीकी और वित्तीय व्यवहार्यता के साथ इस विकल्प की व्यवहारिकता का भी आकलन कर रही है। अध्ययन पूरा होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रस्तावित कॉरिडोर में ड्राइवरलेस तकनीक को अपनाया जाएगा या नहीं।