Delhi EV Policy 2026: दिल्ली सरकार राजधानी में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। अब इस पहल को ऑटो डीलर्स की संस्था फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (FADA) का भी समर्थन मिल गया है। संस्था का मानना है कि पेट्रोल और डीजल वाहनों से पूरी तरह इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ना आसान नहीं होगा। ऐसे में शुरुआती दौर में वाहन कंपनियों, डीलर्स और ग्राहकों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है लेकिन लंबे समय में यह बदलाव पर्यावरण और ऑटो इंडस्ट्री दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगा।
FADA के अध्यक्ष सी.एस. विग्नेश्वर का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों का भविष्य अब दूर नहीं है और पूरे ऑटो सेक्टर को इसके लिए तैयार रहना होगा। ऐसे में केवल नई इलेक्ट्रिक गाड़ियां लॉन्च करना पर्याप्त नहीं होगा। यदि चार्जिंग स्टेशन, सर्विस सेंटर और तकनीकी ढांचा मजबूत नहीं हुआ तो EV अपनाने की रफ्तार प्रभावित हो सकती है।
वहीं संस्था ने यह भी कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों की सर्विसिंग पारंपरिक पेट्रोल-डीजल गाड़ियों से अलग होती है। ऐसे में डीलरशिप पर काम करने वाले तकनीशियनों को नई तकनीक की ट्रेनिंग देने, आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने और ग्राहकों को EV के बारे में जागरूक करने की जरूरत होगी।
दिल्ली सरकार की नई EV नीति के तहत आने वाले सालों में इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता देने की योजना बनाई गई है। वहीं प्रस्ताव के अनुसार अप्रैल 2027 से नए इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर को बढ़ावा दिया जाएगा जबकि अप्रैल 2028 से नए पेट्रोल से चलने वाले दोपहिया वाहनों की बिक्री के फेज को सही तरीके से बंद करने की तैयारी है। इस प्रस्ताव ने ऑटो इंडस्ट्री में नई बहस छेड़ दी है क्योंकि जिन कंपनियों के पास अभी सीमित EV पोर्टफोलियो है उन्हें अपनी रणनीति बदलनी पड़ सकती है।
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देखा जा रहा है कि देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। वहीं जून 2026 में कुल वाहन बिक्री में EV की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से अधिक रही जबकि इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक की मांग सबसे तेजी से बढ़ती देखी जा रही है। इस बदलते बाजार को देखते हुए FADA ने अपने डीलर्स को तकनीकी ट्रेनिंग, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्राहक जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए तैयार करने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि सरकार वाहन निर्माता कंपनियों और डीलर्स के साझा प्रयास से भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की रफ्तार आने वाले सालों में और तेज हो सकती है।