Small Electric Car: बढ़ता ट्रैफिक, पार्किंग की परेशानी और रोजाना आने-जाने का खर्च शहरी लोगों के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। ऐसे में Micro-EV यानी बेहद छोटी इलेक्ट्रिक कारें शहरी मोबिलिटी के एक नए विकल्प के रूप में चर्चा में हैं। वहीं इन गाड़ियों का मकसद बड़ी कारों की जगह लेना ही नहीं बल्कि छोटी दूरी के सफर को आसान और ऊर्जा की खपत को कम करना भी है। साथ ही भारत जैसे घनी आबादी वाले शहरों में इनका कॉन्सेप्ट खास मायने रखता है। लेकिन इनकी सफलता कीमत, सुरक्षा और चार्जिंग जैसी जरूरतों पर निर्भर करेगी।
Micro-EV के बारे में बताए तो ऐसी छोटी इलेक्ट्रिक गाड़ियां होती हैं जिन्हें सीमित जगह और शहरों की छोटी दूरी वाली यात्राओं को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाता है। वहीं कुछ मॉडल सामान्य छोटी कारों जैसे होते हैं जबकि कुछ देशों में क्वाड्रिसाइकिल श्रेणी के बेहद कॉम्पैक्ट वाहन भी उपलब्ध हैं। इनकी लंबाई, क्षमता और कानूनी श्रेणी मॉडल और देश के हिसाब से अलग हो सकती है। वहीं इनका छोटा आकार संकरी सड़कों पर चलने और पार्किंग की जगह तलाशने में मदद कर सकता है। इलेक्ट्रिक मोटर होने के कारण इनमें पेट्रोल या डीजल इंजन की जरूरत भी नहीं होती।
छोटी और हल्की इलेक्ट्रिक गाड़ियों को चलाने के लिए बड़ी कारों की तुलना में कम ऊर्जा की जरूरत पड़ सकती है। NITI Aayog के एक लेख में भारत के लिए विकसित किए जा रहे इलेक्ट्रिक माइक्रोकार कॉन्सेप्ट की ऊर्जा खपत 50 से 70 Wh/km बताई गई है। यह उस खास कॉन्सेप्ट का आंकड़ा है सभी Micro-EV का नहीं।
वहीं कम ऊर्जा खपत से चार्जिंग खर्च घटाने की संभावना रहती है। लेकिन वास्तविक बचत बिजली की दर, वाहन की दक्षता, बैटरी और इस्तेमाल की दूरी पर निर्भर करेगी। खरीद कीमत, बीमा और रखरखाव को भी कुल खर्च में शामिल करना जरूरी है।
बता दें कि दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में रोजाना ऑफिस जाने, बाजार पहुंचने या छोटी दूरी तय करने के लिए कॉम्पैक्ट इलेक्ट्रिक कारें उपयोगी विकल्प बन सकती हैं। लेकिन भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की मौजूदा नीतियों का बड़ा फोकस दोपहिया, तिपहिया वाहनों और चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर पर भी रहा है। इसलिए माइक्रोकारों का बाजार बढ़ना अपने आप तय नहीं है।
छोटी इलेक्ट्रिक कार खरीदने से पहले उसकी वास्तविक रेंज, बैटरी चार्ज होने में लगने वाला समय, सुरक्षा सुविधाएं और स्थानीय सर्विस नेटवर्क जांचना चाहिए। यह भी देखना जरूरी है कि वाहन किस श्रेणी में पंजीकृत होगा और उस पर कौन-से नियम लागू होंगे। Micro-EV शहरों में सफर का एक व्यावहारिक विकल्प बन सकती हैं लेकिन इनकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां इन्हें कितनी किफायती, सुरक्षित और इस्तेमाल में सुविधाजनक बनाती हैं।