ऑटो सेल्स (सौजन्य : सोशल मीडिया) 
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फेस्टिव सीजन में बढ़ा ऑटोमोबाइल सेक्टर का कारोबार, ऑटो सेल्स में हुई इतने प्रतिशत की बढ़त

फाडा की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि सभी व्हीकल सीरीज में सकारात्मक बढ़त देखने को मिली है। जिसका प्रमुख कारण त्योहारी सीजन और मजबूत ग्रामीण डिमांड को बताया जा रहा है।

अपूर्वा नायक

नई दिल्ली: फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन यानी फाडा ने बुधवार को ऑटोमोबाइल सेक्टर को लेकर एक रिपोर्ट जारी की है। जिसके अनुसार पता चला है कि अक्टूबर महीने में भारत की ऑटो सेल्स में प्रतिवर्षानुसार 32 प्रतिशत की मजबूत बढ़त देखने को मिली है। जिसमें टू-व्हीलर सेगमेंट सबसे आगे रहा है।

फाडा की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि सभी व्हीकल सीरीज में सकारात्मक बढ़त देखने को मिली है। जिसका प्रमुख कारण त्योहारी सीजन और मजबूत ग्रामीण डिमांड को बताया जा रहा है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अक्टूबर 2024 में रिटेल सेल्स में करीब 32 प्रतिशत सालाना और 64 प्रतिशत मासिक बढ़त देखने को मिली है।

टू-व्हीलर सेल्स में आकर्षक उछाल

इसने इस बात पर प्रकाश डाला कि दोपहिया यानी टू-व्हीलर की सेल्स में 36 प्रतिशत की प्रभावशाली सालाना वृद्धि हुई, जिसका लाभ नवरात्रि और दिवाली जैसे प्रमुख त्यौहारों के अभिसरण से मिला, जिसने उपभोक्ता डिमांड को काफी बढ़ावा दिया। फाडा ने कहा है कि टू व्हीलर की सेल्स में उछाल आकर्षक फेस्टिव ऑफर, नए मॉडल लॉन्च और बेहतर स्टॉक उपलब्धता से और भी बढ़ गया।

क्रय शक्ति मजबूत

रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण डिमांड ने दोपहिया वाहनों की सेल्स में बढ़त में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसे रबी फसलों के लिए बढ़े हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी से समर्थन मिला, जिससे किसानों की क्रय शक्ति मजबूत हुई।

साल दर साल 32 प्रतिशत की बढ़त

यात्री वाहन यानी पब्लिक व्हीकल सेगमेंट ने भी मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया, जिसमें सेल्स में साल दर साल 32 प्रतिशत की बढ़त हुई है। यह बढ़त मुख्य रूप से त्योहारी सीजन के दौरान हाई डिमांड, आक्रामक डिस्काउंट ऑफर और नए मॉडल लॉन्च, विशेष रूप से एसयूवी सीरीज में होने के कारण हुई।

समग्र मांग प्रभावित

वाणिज्यिक वाहन यानी कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में, सेल्स के आंकड़ों ने साल दर साल 6 प्रतिशत की मामूली बढ़त दिखाई, जिसे कृषि मांग में वृद्धि और कंटेनर मूवमेंट के लिए थोक ऑर्डरों से समर्थन मिला। फेस्टिव सीजन ने इस कैटेगरी में सेल्स को बढ़ावा दिया, लेकिन सुस्त निर्माण गतिविधियों और वाहनों की ऊंची कीमतों जैसी चुनौतियों के कारण वृद्धि कुछ हद तक सीमित रही, जिससे समग्र मांग प्रभावित हुई। तिपहिया यानी थ्री-व्हीलर और ट्रैक्टर की सेल्स में भी बढ़त हुई है, जो क्रमशः 11 प्रतिशत और 3 प्रतिशत की सालाना बढ़त के साथ बढ़ी, क्योंकि गतिशीलता और कृषि सहायता की मांग स्थिर रही।

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