Highlight:
इलेक्ट्रिक कार खरीदने से पहले कुछ बातो का ध्यान रखना जरूरी है।
एक्स-शोरूम कीमत के साथ ऑन-रोड कीमत, इंश्योरेंस की कीमत को जुड़ना चाहिए।
EV और पेट्रोल कार में कुलना के बाद ही कोई फैसला ले।
EV Ownership Cost: इलेक्ट्रिक कार खरीदने का फैसला अक्सर पेट्रोल-डीजल पर होने वाले खर्च को कम करने के लिए लिया जाता है। वहीं EV में इंजन ऑयल जैसे कुछ नियमित खर्च नहीं होते और घर पर चार्जिंग की सुविधा हो तो रोजमर्रा की ड्राइविंग किफायती पड़ सकती है। लेकिन EV Ownership on a Budget का मतलब सिर्फ कम चार्जिंग बिल नहीं है। इसमें कार की शुरुआती कीमत, इंश्योरेंस, टायर, चार्जर लगवाने और लंबी दूरी की यात्रा जैसे खर्च भी आपके बजट को प्रभावित करते हैं। इसलिए EV खरीदने से पहले उसकी कुल ओनरशिप कॉस्ट समझना जरूरी है।
इलेक्ट्रिक कार की एक्स-शोरूम कीमत के साथ ऑन-रोड कीमत, इंश्योरेंस और अन्य लागू शुल्क भी जोड़ें है। वहीं घर पर चार्जिंग पॉइंट लगाने की जरूरत हो तो उसकी इंस्टॉलेशन लागत और बिजली के कनेक्शन में संभावित बदलाव का खर्च भी पता करना जरूरी होता है।
साथ ही EV में पारंपरिक इंजन से जुड़े कुछ मेंटेनेंस खर्च नहीं होते लेकिन टायर, सस्पेंशन, ब्रेक और एयर कंडीशनिंग सिस्टम की देखभाल फिर भी जरूरी है। इसमें टायरों की उम्र ड्राइविंग स्टाइल, सड़क और वाहन के वजन पर भी निर्भर करती है। बैटरी की वारंटी की अवधि, किलोमीटर की सीमा और किन परिस्थितियों में वारंटी लागू होगी यह खरीदने से पहले जरूर पढ़ना चाहिए।
अगर आपके पास अपनी पार्किंग और सुरक्षित चार्जिंग की सुविधा है तो घर पर चार्ज करना सुविधाजनक और कई मामलों में सस्ता पड़ सकता है। साथ ही भारत सरकार के e-AMRIT पोर्टल में बताया गया है कि चार्जिंग की लागत बैटरी क्षमता और बिजली की प्रति यूनिट दर पर निर्भर करती है। इसमें घरेलू बिजली की दरें राज्य और उपभोक्ता श्रेणी के अनुसार अलग हो सकती हैं।
वहीं बचत के लिए कार को जरूरत के हिसाब से चार्ज करें और निर्माता के निर्देशों के मुताबिक चार्जिंग करें। सोसायटी में रहते हैं तो पहले पता करें कि पार्किंग में चार्जर लगाने की अनुमति, मीटरिंग और बिजली के लोड की क्या व्यवस्था है। केवल सामान्य घरेलू सॉकेट उपलब्ध होने पर चार्जिंग शुरू करने से पहले उसकी उपयुक्तता और इलेक्ट्रिकल सेफ्टी की पुष्टि करना जरूरी है।
पब्लिक चार्जिंग स्टेशन पर खर्च नेटवर्क, चार्जर के प्रकार और लागू शुल्क के मुताबिक बदल सकता है। फास्ट चार्जर यात्रा में समय बचा सकता है लेकिन उसकी दर घर की चार्जिंग से अधिक हो सकती है। इसलिए लंबी यात्रा से पहले रास्ते में उपलब्ध चार्जर, उनकी स्थिति और चार्जिंग लागत जांच लें। सिर्फ कंपनी की दावा की गई रेंज पर निर्भर न रहें। एयर कंडीशनिंग, गति, मौसम और सड़क की स्थिति वास्तविक ड्राइविंग रेंज को प्रभावित कर सकते हैं। बजट बनाते समय कुछ अतिरिक्त चार्जिंग समय और खर्च की गुंजाइश रखें।
EV और पेट्रोल कार की तुलना एक जैसी दूरी और समान उपयोग के आधार पर करें। दोनों का अनुमानित खर्च निकालने के लिए खरीद कीमत, फाइनेंस, इंश्योरेंस, ऊर्जा या ईंधन, मेंटेनेंस और चार्जिंग की सुविधा जैसे पहलुओं को शामिल करें। सरकारी e-AMRIT पोर्टल पर उपलब्ध होम चार्जिंग कैलकुलेटर इस अनुमान में मदद कर सकता है।
इसमें ध्यान देने वाली बात यह है कि EV बजट में फायदेमंद हो सकती है खासकर जब रोजाना अच्छी-खासी दूरी तय होती हो और घर पर चार्जिंग संभव हो। लेकिन सही फैसला वही है जिसमें शुरुआती कीमत से लेकर रोजमर्रा के खर्च तक पूरी तस्वीर साफ नजर आए।