Car में ज्यादा लोगों को ले जाना सही नहीं। Source. Gemini
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कार में 5 की जगह 7 लोग बैठाकर निकले तो लगेगा तगड़ा जुर्माना, जानें क्या कहता है ट्रैफिक नियम

Car overloading challan: गाड़ी में लिमिट से ज्यादा लोगों को लेकर जाने पर भी जुर्माना लगता है। इसलिए सभी नियमों के बारे में जानकारी होनी चाहिए। जिससे आप बिना किसी परेशानी के परिवार के साथ सफर कर सकें।

सिमरन सिंह

Vehicles Act 194A: शादी-समारोह, घूमने या परिवार के साथ कहीं जाने के दौरान अक्सर लोग एक ही कार में जरूरत से ज्यादा सवारियां बैठाकर निकल पड़ते हैं। वैसे 5-सीटर कार में 6 से 7 लोग या 7-सीटर में 8 से 9 लोगों को बैठाना कई लोगों को सामान्य लग सकता है लेकिन यह सड़क सुरक्षा के साथ-साथ कानूनी नियमों से भी जुड़ा मामला है। बता दें कि Motor Vehicles Act के तहत वाहन की निर्धारित क्षमता से ज्यादा यात्रियों को बैठाने पर कार्रवाई हो सकती है।

ज्यादा सवारी बैठाने पर कितना लगेगा चालान?

Motor Vehicles Act की धारा 194A के बारे में बताए तो इसके तहत किसी ट्रांसपोर्ट व्हीकल में रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट या परमिट में निर्धारित संख्या से ज्यादा यात्री बैठाने पर ₹200 प्रति अतिरिक्त यात्री का जुर्माना लगाया जाता है। साथ ही अतिरिक्त यात्रियों को उतारे बिना वाहन को आगे जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। जिसका सीधा मतलब है कि नियम के मुताबिक 2 अतिरिक्त यात्री पाए जाने पर ₹400 का जुर्माना बन सकता है। लेकिन स्थानीय नियमों और वाहन की श्रेणी के आधार पर कार्रवाई की स्थिति अलग हो सकती है इसलिए अपनी कार की RC में दर्ज क्षमता देखना जरूरी है।

सीट बेल्ट नहीं लगाई तो अलग से जुर्माना

इसमें ओवरलोडिंग के साथ सीट बेल्ट की अनदेखी करना भी जेब पर भारी पड़ सकता है। जिसमें धारा 194B के अनुसार बिना सीट बेल्ट वाहन चलाने या ऐसे यात्रियों को बैठाने पर ₹1,000 का जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही 14 साल से कम उम्र के बच्चे के लिए सुरक्षा बेल्ट या उपयुक्त चाइल्ड रेस्ट्रेंट सिस्टम का इस्तेमाल भी जरूरी है। वहीं अतिरिक्त यात्री के लिए पर्याप्त सीट बेल्ट न होना इसलिए भी गंभीर है क्योंकि दुर्घटना की स्थिति में सुरक्षा जोखिम बढ़ सकता है।

ओवरलोडिंग से कार की सेफ्टी पर भी असर

कार में क्षमता से ज्यादा लोगों को बैठाने का असर सिर्फ चालान तक सीमित नहीं है। अतिरिक्त वजन से ब्रेक, टायर और सस्पेंशन पर ज्यादा दबाव पड़ सकता है। इमरजेंसी ब्रेकिंग के दौरान वाहन के व्यवहार पर भी असर पड़ सकता है। इसके अलावा ज्यादा वजन के कारण इंजन पर अतिरिक्त दबाव पड़ने से ईंधन दक्षता प्रभावित हो सकती है।

इंश्योरेंस क्लेम भी बन सकता है मामला

वहीं हादसे के बाद ओवरलोडिंग की स्थिति में बीमा पॉलिसी की शर्तें महत्वपूर्ण हो सकती हैं। इसलिए यह मान लेना सही नहीं है कि दुर्घटना के बाद हर स्थिति में क्लेम स्वतः मिल जाएगा। पॉलिसी की शर्तों और हादसे की परिस्थितियों के आधार पर बीमा कंपनी की ओर से आपत्ति उठाई जा सकती है। इसलिए परिवार या दोस्तों के साथ सफर पर निकलते समय कार की RC में दर्ज सीटिंग कैपेसिटी का ध्यान रखें। कुछ लोगों को अतिरिक्त बैठाकर सफर करने के बजाय जरूरत पड़ने पर दूसरी गाड़ी लेना ज्यादा सुरक्षित विकल्प हो सकता है।

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