Cars with High Maintenance Costs: नई कार खरीदते समय ज्यादातर लोगों का ध्यान डिजाइन, फीचर्स, माइलेज और एक्स-शोरूम कीमत पर रहता है। लेकिन कार की असली लागत सिर्फ खरीदने तक सीमित नहीं होती। इसका असली खर्चा सर्विसिंग, स्पेयर पार्ट्स, इंश्योरेंस और रिपेयर के रूप में लंबे समय में बजट बिगाड़ सकता है। खासकर कुछ प्रीमियम और हाई-मेंटेनेंस कारों को खरीदने से पहले इन खर्चों का हिसाब लगाना बेहद जरूरी होता है।
BMW, Mercedes-Benz, Audi, Jaguar और Land Rover जैसे लग्जरी ब्रांड अपनी शानदार डिजाइन, दमदार परफॉर्मेंस और प्रीमियम फीचर्स के लिए जाने जाते हैं। लेकिन इनके रखरखाव का खर्च सामान्य कारों की तुलना में काफी ज्यादा हो सकता है। वहीं इनके स्पेयर पार्ट्स महंगे होने के साथ सर्विसिंग और लेबर चार्ज भी अधिक हो सकते हैं। जिसको देखते हुए छोटी-मोटी खराबी भी कभी-कभी बड़ा बिल बना देती है। इसलिए कम बजट में इस्तेमाल की जाने वाली कार के तौर पर पुरानी लग्जरी कार खरीदना सोच-समझकर किया जाना चाहिए।
देखा गया है कि कई प्रीमियम कारों में इस्तेमाल होने वाले पार्ट्स विदेश से आयात किए जाते हैं। इससे पार्ट्स की कीमत बढ़ने के साथ उन्हें उपलब्ध कराने में भी ज्यादा समय लग सकता है। ऐसे में एक्सीडेंट की स्थिति में मामला और महंगा हो सकता है क्योंकि बॉडी पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और दूसरे कंपोनेंट्स का रिप्लेसमेंट काफी खर्चीला हो सकता है। इसी वजह से ऐसी कार खरीदते समय सिर्फ कीमत नहीं बल्कि इंश्योरेंस प्रीमियम और कवरेज को भी जरूर जांचना चाहिए।
जैसा कि सभी को पता है कि डीजल कारें बेहतर माइलेज दे सकती हैं लेकिन पुराने मॉडल खरीदने से पहले स्थानीय नियमों की जानकारी जरूरी है। कुछ शहरों में पुराने डीजल वाहनों को लेकर उम्र संबंधी प्रतिबंध लागू हैं। इसके अलावा डीजल इंजन के कुछ प्रमुख कंपोनेंट्स की खराबी महंगी साबित हो सकती है। इसको खासकर सेकंड हैंड कार खरीदते समय इंजन, क्लच, टर्बो और अन्य महंगे हिस्सों की स्थिति की जांच करवाना समझदारी होगी।
महंगी कार का मतलब हमेशा बेहतर रीसेल वैल्यू नहीं होता। कुछ लग्जरी और हाई-मेंटेनेंस मॉडल समय के साथ तेजी से कीमत खो सकते हैं। ऐसे में मालिक को एक तरफ सर्विसिंग और रिपेयर पर ज्यादा खर्च करना पड़ता है वहीं बेचते समय उम्मीद से कम रकम मिलती है। ऐसे में कार खरीदने से पहले क्या करें? मॉडल की सर्विस कॉस्ट, स्पेयर पार्ट्स की कीमत, इंश्योरेंस प्रीमियम, माइलेज और नजदीकी सर्विस सेंटर की उपलब्धता जरूर जांचें। सेकंड हैंड कार है तो मौजूदा मालिकों के अनुभव और सर्विस हिस्ट्री भी देखें। आखिरकार सस्ती कार वही नहीं जिसकी कीमत कम हो बल्कि वह है जिसे लंबे समय तक चलाना आपकी जेब पर भारी न पड़े।