Rahu Dosh Ke Upay: वैदिक ज्योतिष में राहु को छाया ग्रह माना जाता है। कुंडली में राहु की स्थिति का पता चलते ही भ्रम, मानसिक अशांति, अचानक आने वाली बाधाओं और अनिश्चित परिस्थितियों का भान होने लगता है।
ऐसे में राहु के अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए कई तरह के धार्मिक उपाय बताए जाते हैं। इनमें कुछ देवी-देवताओं की पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है।
राहु की शांति के लिए मां दुर्गा की उपासना को महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि देवी की आराधना व्यक्ति को नकारात्मकता और भय से बचाने में सहायक होती है। दुर्गा सप्तशती का पाठ, देवी मंत्रों का जाप और श्रद्धापूर्वक पूजा करना राहु से जुड़े ज्योतिषीय उपायों में कारगर है।
भगवान शिव की पूजा भी राहु-केतु के दोषों से मुक्ति दिलाती है। शिवलिंग पर जल अर्पित करना, महामृत्युंजय मंत्र का जाप और रुद्राभिषेक जैसे उपाय धार्मिक परंपराओं में बताए जाते हैं। त्र्यंबकेश्वर जैसे तीर्थस्थलों पर राहु-केतु शांति से जुड़े विशेष पूजा की जाती है।
भगवान शिव के उग्र स्वरूप कालभैरव की पूजा को भी कुछ ज्योतिषीय परंपराओं में राहु से जोड़ा जाता है और इसे राहु दोष से मुक्ति का मार्ग माना जाता है। मान्यता के अनुसार कालभैरव की आराधना भय और नकारात्मक प्रभाव से रक्षा के लिए की जाती है। शनिवार या भैरव अष्टमी के दिन काल भैरव की विशेष पूजा की जाती है।
देवी-देवताओं की पूजा के साथ राहु मंत्र का जाप भी ज्योतिषीय उपायों में शामिल है। राहु बीज मंत्र का जाप या नवग्रह पूजा किसी योग्य ज्योतिष की सलाह के अनुसार किया जाता है।
राहु दोष के उपाय व्यक्ति की कुंडली में राहु की स्थिति के अनुसार अलग-अलग बताए जाते हैं। इसलिए बिना कुंडली देखे किसी विशेष पूजा, रत्न या उपाय को नहीं अपनाना चाहिए। इसके लिए योग्य ज्योतिष से सलाह लेनी चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, राहु की शांति के लिए मां दुर्गा, भगवान शिव और कालभैरव की आराधना प्रमुख उपाय मानी जाती है।