नई दिल्ली. एक बड़ी खबर के मुताबिक, चक्रवात 'बिपारजॉय' के कल यानी गुरूवार शाम 4 से 8 बजे के बीच सौराष्ट्र, कच्छ जखाऊ पोर्ट के पास और पाकिस्तान के हिस्से में टकराने के आसार हैं। वहीं इसके चलते कच्छ, देवभूम द्वारका, पोरबंदर, जामनगर, राजकोट और मोरबी जिले में भारी से भारी बारिश की भी अपार संभावना है।
ऐसे में अब चक्रवात बिपारजॉय का सूरत में गंभीर असर देखा जा रहा है। सूरत में कई स्थानों पर तेज हवा की वजह से पेड़ उखड़ गए। इस बीच मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इमरजेंसी मीटिंग की है।
फिलहाल चक्रवात बिपारजॉय कच्छ से 290 किमी दूर है। तूफान 15 जून को शाम 5 बजे के आसपास लैंडफॉल करेगा। वहीं सभी संभावित प्रभावित जिलों में NDRF की टीमें तैनात कर दी गई हैं। कच्छ और द्वारका में अधिक वर्षा की संभावना है। अब तक 50 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। बिजली कर्मचारियों की 200 टीमें लगाई गई हैं।
इस बाबत IMD के महानिदेशक डॉ मृत्युंजय महापात्र ने जानकारी देते हुए कहा कि, चक्रवात बिपरजोय पोरबंदर से 350 किमी, द्वारका से 290 किमी दूरी पर केंद्रभूत है। हमारे पूर्वानुमान के मुताबिक यह 15 जून को शाम के समय तट से टकराएगा जिसकी रफ्तार 125-135 किमी प्रति घंटा तक होगी।
वहीं चक्रवात 'बिपारजॉय' के बंदोबस्त पर NDRF के DIG मोहसिन शाहिदी ने जानकारी दी कि, गुजरात में 15 तारीख की शाम चक्रवात का लैंडफॉल होने वाला है, इसके मद्देनज़र NDRF की 18 टीम की तैनाती की गई है, SDRF की 13 टीम मौजूद है। ऐसे में स्थिति को देखते हुए 44,000 से ज़्यााद लोग सुरक्षित स्थान पर पहुंचाए गए हैं। कंट्रोल रूम सक्रिय है। लोगों से घर पर रहने की अपील है।
जानकारी दें कि, चक्रवात बिपारजॉय के संभावित खतरे की के चलते फिलहाल गुजरात में हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है। वहीं इस चक्रवात का सबसे ज्यादा असर कच्छ में देखा जा रहा है। यहां अब तक 17,739 लोगों को शिफ्ट किया गया है। इनके अलावा जामनगर में भी 8,542 लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा। गुजरात सरकार ने विस्थापित लोगों के लिए सैकड़ों राहत शिविर स्थापित किए हैं। अब तक कुल 47,113 लोग विस्थापित हुए हैं।