डोनाल्ड ट्रंप (सोर्स- सोशल मीडिया)
What is Trump’s Next Move: इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता पूरी तरह विफल हो गई है। करीब 21 घंटे तक चली बातचीत में दोनों देशों के बीच अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी, जिसके चलते कोई भी ठोस समझौता नहीं हो पाया। वार्ता टूटने के बाद क्षेत्र में तनाव एक बार फिर बढ़ने की आशंका गहरी हो गई है और पहले से घोषित अस्थायी सीजफायर के भविष्य पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि बातचीत के दौरान अमेरिका ने गंभीर और लचीला रवैया अपनाया, लेकिन ईरान अमेरिकी शर्तों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हुआ। वेंस के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच करीब 21 घंटे तक चर्चा चली, जिसमें कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार हुआ, लेकिन अंतिम समझौता संभव नहीं हो सका। उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत का चैनल पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, हालांकि मौजूदा स्थिति में कोई प्रगति नहीं दिख रही।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही यह संकेत दे चुके हैं कि अगर ईरान समझौते पर नहीं पहुंचता तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। वार्ता विफल होने के बाद आशंका जताई जा रही है कि तनाव और बढ़ सकता है और सैन्य टकराव की स्थिति भी बन सकती है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन बयानबाज़ी ने क्षेत्रीय अनिश्चितता को बढ़ा दिया है।
इसी बीच, रणनीतिक रूप से बेहद अहम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी तनाव बढ़ने की आशंका है। यह वही मार्ग है जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। यदि यहां स्थिति बिगड़ती है तो अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है, जिससे तेल की कीमतों में उछाल और महंगाई बढ़ने का खतरा है।
दूसरी ओर, पश्चिम एशिया में पहले से ही इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष जारी है, खासकर लेबनान में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। हालिया घटनाओं में कई लोगों की मौत की खबरों ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास दोबारा शुरू नहीं हुए तो यह संकट केवल क्षेत्रीय नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा दोनों पर इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।