

London Protest: ब्रिटेन में शनिवार को सरकार के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन हुए। सरकार की इमिग्रेशन नीति के खिलाफ हुए इन प्रदर्शनों में वर्तमान सरकार को हटाकर चुनाव कराने और नई सरकार लाने की मांग की गई। यह सब कुछ हाल ही में नेपाल में हुए जेन जी प्रदर्शन से काफी मिलता-जुलता है। इसके बाद कहा जा रहा है कि क्या जो कुछ नेपाल में हुआ, वह ब्रिटेन या फ्रांस में भी हो सकता है?
दरअसल, हाल ही में फ्रांस में सरकार के खिलाफ हिंसक विरोध-प्रदर्शन हुए। वहीं, शनिवार को ब्रिटेन में कट्टरपंथी नेता टॉमी रॉबिन्सन द्वारा आयोजित 'यूनाइट द किंगडम' रैली में करीब एक लाख लोग शामिल हुए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं, जिनमें करीब 26 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। यूनाइट द किंगडम रैली का मुख्य मकसद देश में बढ़ते इमिग्रेशन की समस्या को लेकर था।
ब्रिटेन में इमिग्रेशन एक बड़ा मुद्दा बन गया है। यहाँ के लोगों का मानना है कि बाहर से आने वाले इमिग्रेंट्स के कारण उनकी नौकरियों पर खतरा मंडराने लगा है। दिलचस्प बात यह है कि भारत और पाकिस्तान के नागरिकों के अलावा ब्रिटेन में सबसे बड़ी प्रवासी आबादी सीरिया,अफगानिस्तान और ईरान जैसे देशों से आई है उन देशों पर, अमेरिका के साथ मिलकर, आतंकवाद के नाम पर ब्रिटेन ने भी कभी हवाई हमले किए हैं।
13 सितंबर को लंदन में हुए प्रदर्शनों का समर्थन टेस्ला के मालिक एलन मस्क ने भी किया है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन के लोग हिंसा से बच नहीं सकते, हिंसा उनके दरवाजे तक आकर रहेगी, चाहें वे चाहें या न चाहें। उन्होंने कहा कि हमें रुककर सोचने की जरूरत है कि हिंसा का कोई इलाज नहीं है। लोगों के पास अब बस दो ही रास्ते हैं, लड़ो या फिर मरो।
एलन मस्क ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की आलोचना करते हुए कहा कि इस सरकार को हटाने का यही सही समय है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन में चुनाव होने में अभी बहुत समय है; तब तक इंतजार नहीं किया जा सकता। ऐसे में सिर्फ लड़ाई ही एकमात्र रास्ता बचता है।