मौत को मात! वेनेजुएला में 2200 मौतों के बीच 8 दिन बाद मलबे से जिंदा निकला शख्स; जानें कैसे हुआ ये 'चमत्कार'

Venezuela Earthquake: वेनेजुएला में भूकंप के 8 दिन बाद मलबे से एक सिक्योरिटी गार्ड को सुरक्षित निकाला गया है। 2200 मौतों के बीच 43 वर्षीय हर्नान फ्लोरेस का बचना एक बड़ा चमत्कार माना जा रहा है।
A final volcanic eruption occurs 8 days later amidst 2,200 restaurants in Venezuela; find out how this 'miracle' happened.
वेनेजुएला में भूकंप से मची तबाही, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Venezuela Earthquake Latest News In Hindi: वेनेजुएला में पिछले दिनों आए विनाशकारी भूकंप ने जहां हजारों घरों को मलबे में तब्दील कर दिया और 2200 से अधिक लोगों की जान ले ली, वहीं इसी मलबे के नीचे से उम्मीद की एक ऐसी किरण निकली है जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है।

24 जून को आए भीषण भूकंप के आठ दिन बाद, बचाव दल ने 'गैलरियस प्लाया ग्रांडे' शॉपिंग सेंटर के बेसमेंट से 43 वर्षीय सुरक्षा गार्ड हर्नान अल्बर्टो गिल फ्लोरेस को जिंदा बाहर निकाला है। इसे इस सदी के सबसे मुश्किल और चमत्कारी रेस्क्यू ऑपरेशनों में से एक माना जा रहा है।

100 घंटे से भी ज्यादा लगा समय

हर्नान को मलबे से बाहर निकालना कोई आसान काम नहीं था। बचाव कर्मियों ने उन्हें ढूंढने और बाहर निकालने के लिए 100 घंटे से भी ज्यादा समय तक बिना रुके काम किया। इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी चुनौती अस्थिर ढांचा, भारी बारिश और लगातार आ रहे आफ्टरशॉक्स थे।

इस बचाव कार्य में केवल वेनेजुएला की टीमें ही नहीं, बल्कि चिली, अमेरिका, पुर्तगाल, मैक्सिको, कोस्टा रिका और अल साल्वाडोर की विशेषज्ञ टीमों ने भी दिन-रात एक कर दिया।

मौत के केबिन में कैसे बची जान?

हर्नान गिल फ्लोरेस उस शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में नाइट-शिफ्ट गार्ड के तौर पर काम करते थे। जब 7.2 और 7.5 तीव्रता के जबरदस्त झटके लगे, तो हर्नान अपने छोटे से सिक्योरिटी केबिन के अंदर थे।किस्मत से कंक्रीट का भारी ढांचा गिरा तो सही, लेकिन उनकी केबिन टिकी रही, जिससे वहां हवा आने-जाने की एक छोटी सी जगह बन गई और वे मलबे के नीचे दबने से बच गए।

पत्नी को न बताने की थी गुहार

रेस्क्यू के दौरान एक भावुक क्षण तब आया जब कोस्टा रिका रेड क्रॉस की टीम हर्नान तक पहुंची। हर्नान ने डर के मारे रेस्क्यूअर से कहा था कि वे उनकी पत्नी को न बताएं कि वह जिंदा है, क्योंकि उन्हें डर था कि शायद वह बाहर निकलने तक जीवित न रह पाएं। हालांकि, उनकी पत्नी गुसबिमार गोंजालेज ने हार नहीं मानी थी। उन्होंने बताया कि जब उन्हें पति के जीवित होने का पता चला, तो उन्हें 'अंधेरे में उम्मीद की एक किरण' दिखाई दी।

ड्राइंग बनाकर बिताया समय

मलबे के नीचे दबे होने के बावजूद हर्नान ने अपना हौसला नहीं खोया। बचाव दल ने टेलीस्कोपिक कैमरों के जरिए उन पर नजर रखी और एक संकरे रास्ते से उन्हें पानी और तरल पोषक तत्व पहुंचाए। बचाव के आखिरी घंटों में वे समय बिताने के लिए ड्राइंग कर रहे थे, ताकि उनका ध्यान डर से हट सके। चिली के फायरफाइटर्स ने उन्हें चश्मा पहनने और शांत रहने की सलाह दी ताकि गिरते मलबे से उनकी आंखों को नुकसान न पहुंचे।

त्रासदी के बीच बड़ा 'चमत्कार'

आमतौर पर किसी भी आपदा में 48 से 72 घंटों के बाद जीवित बचने की उम्मीद खत्म हो जाती है, लेकिन हर्नान ने 8 दिनों तक मौत से जंग लड़कर इतिहास रच दिया। वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने इस सफलता का जश्न मनाया और इसे इंसानियत की जीत बताया। फिलहाल हर्नान अस्पताल में भर्ती हैं, जहां डॉक्टर उनके स्वास्थ्य पर नजर रख रहे हैं।

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