जंग के जख्मों पर चीन का मरहम! ईरान को दी 2 लाख डॉलर की आर्थिक मदद, पश्चिम एशिया में बढ़ेगा बीजिंग का दबदबा

China Aid to Iran Red Crescent: चीन की रेड क्रॉस सोसाइटी द्वारा दी गई यह 2 लाख डॉलर की राशि शायद युद्ध के भारी नुकसान के सामने कम लगे, लेकिन यह भविष्य के 'चीन-ईरान-रूस' गठबंधन की मजबूती को दर्शाती है।
china red cross society donates 2 lakh dollars to iran red crescent
राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और शी जिनपिंग, (सोर्स- सोशल मीडिया)
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China Red Cross Society Donation: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और मानवीय संकट के बीच चीन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। चीन की 'रेड क्रॉस सोसाइटी' (RCSC) ने घोषणा की है कि वह ईरान की 'रेड क्रेसेंट सोसाइटी' (IRCS) को 2 लाख डॉलर (लगभग 1.68 करोड़ रुपये) की आपातकालीन नकद सहायता प्रदान करेगी। यह सहायता मुख्य रूप से युद्ध और विस्थापन से प्रभावित लोगों की मानवीय जरूरतों को पूरा करने के लिए दी जा रही है।

पिछले कुछ हफ्तों में मिडिल ईस्ट (विशेषकर ईरान, इजरायल और लेबनान के बीच) में बढ़े सैन्य संघर्ष ने बड़े पैमाने पर मानवीय संकट पैदा कर दिया है। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी 'सिन्हुआ' के अनुसार, रेड क्रॉस सोसाइटी ऑफ चाइना ने स्पष्ट किया है कि यह सहायता पूरी तरह से मानवीय आधार पर दी गई है। इस धनराशि का उपयोग ईरान में शरणार्थियों की मदद, चिकित्सा आपूर्ति की कमी को दूर करने और युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी राहत कार्य चलाने के लिए किया जाएगा।

चीन-ईरान संबंधों के आर्थिक और रणनीतिक मायने

विशेषज्ञों का मानना है कि इस छोटी लेकिन प्रतीकात्मक सहायता के पीछे गहरे रणनीतिक संकेत छिपे हैं।

  • सॉफ्ट पावर का प्रदर्शन: चीन खुद को वैश्विक शांति दूत और संकट के समय मददगार के रूप में पेश करना चाहता है।
  • रणनीतिक साझेदारी: चीन और ईरान के बीच 25 साल का व्यापक रणनीतिक सहयोग समझौता है। जब ईरान पर पश्चिमी देशों (विशेषकर अमेरिका) द्वारा कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए हैं, तब चीन की ओर से मिली यह मदद तेहरान के लिए एक बड़े नैतिक समर्थन के रूप में देखी जा रही है।
  • ऊर्जा सुरक्षा: ईरान चीन को कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाला एक प्रमुख देश है। क्षेत्र में अस्थिरता का सीधा असर चीन की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है, इसलिए वह ईरान में स्थिरता बनाए रखने के लिए हर संभव छोटे-बड़े प्रयास कर रहा है।

विपक्ष और वैश्विक प्रतिक्रिया

भारत जैसे देशों में इस खबर को ऊर्जा संकट के चश्मे से देखा जा रहा है। हाल ही में लोकसभा में भी तेल और ऊर्जा सुरक्षा पर बहस छिड़ी है। चीन द्वारा ईरान को दी गई इस मदद पर कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह अमेरिका को एक संदेश है कि चीन उन देशों के साथ मजबूती से खड़ा है जिन पर अमेरिका दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।

चीन की रेड क्रॉस सोसाइटी द्वारा दी गई यह 2 लाख डॉलर की राशि शायद युद्ध के भारी नुकसान के सामने कम लगे, लेकिन यह भविष्य के 'चीन-ईरान-रूस' गठबंधन की मजबूती को दर्शाती है। चीन ने एक बार फिर साबित किया है कि वह पश्चिम एशिया की राजनीति में न केवल एक आर्थिक शक्ति है, बल्कि एक सक्रिय मानवीय खिलाड़ी के रूप में भी अपनी जगह बना रहा है।

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