रूस से Su-57 जेट खरीदे तो…अमेरिका ने इस देश को दी टैरिफ लगाने की धमकी, भारत की भी बढ़ेगी टेंशन
Algeria Russia Jet Deal: रूस से Su-57 फाइटर जेट खरीदने को लेकर अल्जीरिया पर अमेरिका की नाराज़गी बढ़ी है। CAATSA प्रतिबंध की चेतावनी से भारत समेत कई देशों की चिंता बढ़ गई है।
- Written By: अक्षय साहू
रूस के साथ Su-57 फाइटर जेट डील को लेकर अमेरिका ने अल्जीरिया को चेतावनी दी (सोर्स- सोशल मीडिया)
US Warns Algeria Over Russia Su-57 Fighter Jet Deal: रूस से अत्याधुनिक Su-57 फाइटर जेट खरीदने को लेकर अल्जीरिया पर आई रिपोर्ट्स ने अमेरिका की चिंता बढ़ा दी है। वॉशिंगटन ने इस संभावित डील पर नाराजगी जताते हुए संकेत दिया है कि वह अफ्रीका के सबसे बड़े देश अल्जीरिया के खिलाफ प्रतिबंध लगा सकता है। अमेरिका ने साफ किया है कि यदि अल्जीरिया ने Su-57 की खरीद आगे बढ़ाई तो उस पर काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शन्स एक्ट (CAATSA) के तहत कार्रवाई हो सकती है।
अमेरिकी विदेश विभाग के ब्यूरो ऑफ ईस्टर्न अफेयर्स के प्रमुख रॉबर्ट पैलाडिनो ने सीनेट कमेटी के सामने सुनवाई के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि रूस से सैन्य उपकरण खरीदने से जुड़ी अल्जीरिया की रिपोर्ट्स अमेरिकी प्रशासन के लिए चिंता का विषय हैं। पैलाडिनो के मुताबिक, अमेरिका अल्जीरिया के साथ कई मुद्दों पर सहयोग कर रहा है, लेकिन हथियारों की खरीद को लेकर दोनों देशों के बीच गंभीर मतभेद बने हुए हैं।
अल्जीरिया पर लगाएंगे प्रतिबंध
पैलाडिनो ने कहा, “फिलहाल हम कूटनीतिक बातचीत का रास्ता अपना रहे हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर CAATSA के तहत प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं ताकि ऐसे सैन्य सौदों को रोका जा सके।”
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2025 में हुई थी डील की पुष्टि
अल्जीरिया ने पिछले साल रूस से उसके सबसे आधुनिक फाइटर जेट Su-57 की खरीद की पुष्टि की थी। इसके साथ ही वह इस विमान का पहला विदेशी ग्राहक बन गया। रूस की योजना अल्जीरिया को एडवांस्ड फाइटर जेट सप्लाई करने की है, जिसकी डिलीवरी इस साल के अंत तक होने की संभावना है। फिलहाल अल्जीरियाई पायलट रूस में इस विमान की ट्रेनिंग ले रहे हैं।
Su-57 की खासियत
Su-57 को रूस के सुखोई डिजाइन ब्यूरो ने विकसित किया है। इस फाइटर जेट ने 2010 में अपनी पहली उड़ान भरी थी और 2020 में इसे रूसी वायुसेना में शामिल किया गया। ‘फेलॉन’ नाम से जाना जाने वाला यह पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान अमेरिका, फ्रांस और चीन के फाइटर जेट्स को वैश्विक बाजार में कड़ी चुनौती दे रहा है।
भारत के लिए क्यों बढ़ेगी टेंशन?
भारत के लिए रूसी हथियार दशकों से भरोसेमंद रहे हैं और अब Su-57 को लेकर भी नई दिल्ली में विचार किया जा रहा है। भारतीय वायुसेना को आधुनिक लड़ाकू विमानों की सख्त जरूरत है और इस जरूरत को पूरा करने के लिए जिन विकल्पों पर चर्चा हो रही है, उनमें Su-57 एक अहम नाम है।
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हालांकि, अमेरिका के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहे भारत के लिए यह डील आसान नहीं होगी। जिस तरह अमेरिका ने अल्जीरिया के मामले में सख्त रुख दिखाया है, उससे यह साफ है कि अगर भारत Su-57 खरीदता है तो वॉशिंगटन की नाराज़गी झेलनी पड़ सकती है।
Frequently Asked Questions
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Que: अमेरिका अल्जीरिया पर प्रतिबंध क्यों लगाने की चेतावनी दे रहा है?
Ans: अमेरिका का मानना है कि रूस से Su-57 जैसे उन्नत हथियार खरीदना उसके सुरक्षा हितों के खिलाफ है। इसी वजह से वह CAATSA कानून के तहत अल्जीरिया पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है।
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Que: CAATSA क्या है और यह कैसे लागू होता है?
Ans: CAATSA अमेरिका का कानून है, जिसके तहत रूस, ईरान और उत्तर कोरिया से बड़े सैन्य सौदे करने वाले देशों पर आर्थिक और कूटनीतिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
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Que: Su-57 फाइटर जेट की खासियत क्या है?
Ans: Su-57 रूस का पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर जेट है। इसमें एडवांस रडार, सुपरक्रूज क्षमता और मल्टीरोल कॉम्बैट फीचर्स हैं, जो इसे आधुनिक युद्ध के लिए बेहद प्रभावी बनाते हैं।
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Que: भारत के लिए Su-57 डील क्यों अहम है?
Ans: भारतीय वायुसेना को आधुनिक लड़ाकू विमानों की जरूरत है। Su-57 इस जरूरत को पूरा कर सकता है, लेकिन अमेरिका के साथ रणनीतिक रिश्तों के कारण यह फैसला भारत के लिए संवेदनशील बन गया है।
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Que: क्या भारत पर भी CAATSA प्रतिबंध लग सकते हैं?
Ans: सैद्धांतिक रूप से हां। अगर भारत रूस से Su-57 खरीदेगा तो अमेरिका नाराज हो सकता है। हालांकि भारत पहले भी कूटनीतिक प्रयासों से प्रतिबंधों से बचने में सफल रहा है।
