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ईरान युद्ध में AI का खौफ: ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ में पेंटागन ने उतारे स्वायत्त हथियार

AI Warfare: पेंटागन ने पुष्टि की है कि 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' में AI और ड्रोन्स का इस्तेमाल हो रहा है। इससे ईरान की मिसाइल क्षमता 86% कम हुई है, लेकिन युद्ध में करीब 1045 लोगों की मौत हो चुकी है।

  • Written By: प्रिया सिंह
Updated On: Mar 05, 2026 | 09:35 AM

युद्ध सचिव पीट हेगसेथ (सोर्स-सोशल मीडिया)

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AI Technology In US Iran War: पेंटागन ने अब आधिकारिक तौर पर यह स्वीकार कर लिया है कि ईरान के विरुद्ध जारी ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ में सबसे आधुनिक AI और स्वायत्त हथियारों का सहारा लिया जा रहा है। युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने बताया कि स्मार्ट तकनीक वाले ड्रोन्स और प्रणालियां इस सैन्य अभियान की रीढ़ की हड्डी बन चुकी हैं। यह आधुनिक युद्ध कौशल का एक नया चेहरा है जहां मशीनी बुद्धिमत्ता सीधे तौर पर रणभूमि में फैसले ले रही है। हालांकि सुरक्षा कारणों से इस तकनीक की पूरी जानकारी अभी दुनिया के साथ साझा नहीं की गई है।

युद्ध के मैदान में मशीनी दिमाग

युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने पुष्टि की है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ स्वायत्त प्रणालियों और AI तकनीक का भरपूर उपयोग कर रहा है। पेंटागन के अनुसार ये स्मार्ट ड्रोन्स और आधुनिक प्रणालियां बिना किसी मानवीय चूक के ईरान के सैन्य ठिकानों की निगरानी और उन पर हमले कर रही हैं। इस तकनीक ने युद्ध की परिभाषा बदल दी है क्योंकि अब फैसले मशीनी बुद्धिमत्ता और सटीक डेटा के आधार पर लिए जा रहे हैं।

हजारों सैन्य ठिकानों पर प्रहार

अमेरिकी एयर फोर्स जनरल डैन केन ने जानकारी दी कि ऑपरेशन के पहले चरण में अब तक 2,000 से अधिक ईरानी ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया है। इन हमलों का मकसद ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम और उसकी नौसैनिक शक्ति को पूरी तरह से निष्क्रिय करना है ताकि वह पलटवार न कर सके। सैन्य अधिकारियों का मानना है कि इन सटीक हवाई हमलों ने दुश्मन की युद्ध करने की बुनियादी क्षमता को काफी हद तक तोड़ दिया है।

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ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के लक्ष्य

ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तीन प्रमुख लक्ष्य हैं- मिसाइल सिस्टम का विनाश, नौसेना को खत्म करना और भविष्य की सैन्य पुनर्निर्माण क्षमताओं को बाधित करना। पेंटागन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि ईरान अपनी सैन्य शक्ति को दोबारा तेजी से खड़ा न कर सके और क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे। कूटनीतिक दबाव के साथ-साथ यह सैन्य कार्रवाई ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को कुचलने के लिए एक निर्णायक और कड़ा कदम मानी जा रही है।

सटीक हमलों का नया दौर

अमेरिकी सेना अब लंबी दूरी के हमलों को छोड़कर सीधे ईरान के हवाई क्षेत्र के ऊपर से सटीक और घातक प्रहार करने की नई रणनीति अपना रही है। इस योजना के कारण ईरान की थिएटर बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च करने की क्षमता में पहले दिन के मुकाबले लगभग 86 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है। हालांकि जनरल केन ने चेतावनी दी है कि यह अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है क्योंकि स्थिति बहुत जटिल और अप्रत्याशित बनी हुई है।

मानवीय क्षति और गहराता संकट

तकनीकी सफलता के बावजूद इस युद्ध की मानवीय कीमत बहुत बड़ी है क्योंकि अब तक हमलों में 1045 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इनमें मीनाब के स्कूल की वे 165 मासूम छात्राएं भी शामिल हैं जिनका भविष्य इस भीषण और बर्बर युद्ध की आग में जलकर खाक हो गया है। श्रीलंका के तट पर डूबे ईरानी युद्धपोत से मिले 87 सैनिकों के शवों ने भी दुनिया को युद्ध की विभीषिका का असली चेहरा दिखाया है।

यह भी पढ़ें: संमदर के अंदर शुरू हुई भयंकर जंग…ईरानी जहाज पर पनडुब्बी का अटैक, एक की मौत, कई घायल और 100 से ज्यादा लापता

भारत पर युद्ध का आर्थिक असर

प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीयों की सुरक्षा को लेकर ओमान और कुवैत के नेताओं से बात की है क्योंकि वहां करीब एक करोड़ भारतीय आज भी फंसे हुए हैं। भारत का करीब 1200 करोड़ रुपये का 4 लाख टन चावल भी असुरक्षित समुद्री रास्तों के कारण विदेशी बंदरगाहों पर अटका हुआ है जो भारी नुकसान है। पूरी दुनिया अब केवल यह उम्मीद कर रही है कि यह खूनी संघर्ष जल्द थमे ताकि मासूमों की जान और वैश्विक अर्थव्यवस्था को बचाया जा सके।

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Published On: Mar 05, 2026 | 09:35 AM

Topics:  

  • AI
  • Israel Iran Tension
  • US Iran Tensions
  • World News

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