पाक की मध्यस्थता फेल! ट्रंप के हमलों से 'इस्लामाबाद MoU' ध्वस्त, बैकफुट पर शहबाज सरकार

US Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर अब खत्म हो गया है। ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने भी पलटवार किया है, जिससे मध्यस्थता करने वाला पाकिस्तान अब संकट में है।
Pakistan's mediation bid fails! 'Islamabad MoU' collapses under Trump's attacks; Shehbaz government on the back foot.
मोजतबा खामेनेई, शहबाज शरीफ और डोनाल्ड ट्रंप, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

US Iran War Pakistan Reaction: मीडिल ईस्ट में एक बार फिर बारूद के ढेर पर खड़ा नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच मुश्किल से स्थापित हुआ सीजफायर केवल 20-21 दिनों के भीतर ही ध्वस्त हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा कर दी है कि दोनों देशों के बीच हुआ अंतरिम समझौता अब 'खत्म' हो चुका है। इस घोषणा के साथ ही अमेरिकी सेना ने ईरान पर लगातार दो दिनों तक हमले किए, जिससे क्षेत्र में पूर्ण युद्ध का खतरा मंडराने लगा है।

ट्रंप का कड़ा रुख

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर निशाना साधा। ट्रंप ने हमलों के बाद कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अब बातचीत का पिछला आधार समाप्त हो गया है, हालांकि उन्होंने भविष्य में संवाद के रास्ते खुले रखने की बात भी कही है।

इन हमलों ने न केवल ईरान को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भी अचानक उछाल ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष बढ़ता है, तो Strait of Hormuz से होने वाली वैश्विक तेल और गैस की सप्लाई पूरी तरह बाधित हो सकती है।

अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल अटैक

अमेरिका की कार्रवाई के जवाब में ईरान ने भी आक्रामक रुख अपनाया है। ईरान ने बहरीन, कतर और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोन से भीषण हमले किए हैं। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेरी कलीबाफ ने सोशल मीडिया के जरिए अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि 'दादागिरी और वादे तोड़ने की कीमत चुकानी होगी।'

ईरान का दावा है कि अंतरिम युद्धविराम समझौता उसे होर्मुज के ट्रैफिक को प्रबंधित करने का अधिकार देता है, और वे किसी भी हमले का जवाब देने के लिए तैयार हैं।

बैकफुट पर पाकिस्तान

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक असहज स्थिति पाकिस्तान की है। पाकिस्तान ने ही अमेरिका और ईरान के बीच 'इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU)' के तहत मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। पाकिस्तान को उम्मीद थी कि इस सफल मध्यस्थता से वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि सुधार पाएगा, लेकिन युद्ध शुरू होने से उसके अरमानों पर पानी फिरता दिख रहा है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर गहरी चिंता जताई है और दोनों देशों से 'संयम' बरतने की अपील की है। इस्लामाबाद ने आग्रह किया है कि सभी पक्ष 'इस्लामाबाद मेमोरेंडम' के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करें, क्योंकि कूटनीति का कोई विकल्प नहीं है। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि ट्रंप प्रशासन अब पाकिस्तान जैसे बिचौलियों की अपील को नजरअंदाज करता दिख रहा है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता खतरा

इस युद्ध के दोबारा शुरू होने से पूरी दुनिया की चिंताएं बढ़ गई हैं। मिडिल ईस्ट में अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक ईंधन की कीमतों पर पड़ता है। यदि यह तनाव लंबा खिंचता है, तो यह केवल दो देशों की जंग नहीं रहेगी, बल्कि पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकती है।

Navbharat Live
navbharatlive.com