ईरान जंग में US को अपनों ने ही दिया 'धोखा'? इटली से तुर्की तक, किन-किन देशों ने मोड़ा मुंह; देखें पूरी लिस्ट

US Iran War NATO Allies: 28 फरवरी से जारी ईरान युद्ध में अमेरिका अपने ही सहयोगियों के कारण अलग-थलग पड़ता दिख रहा है। इटली, तुर्की, स्पेन और ब्रिटेन जैसे देशों ने सैन्य साथ देने से साफ इनकार कर दिया है।
Did US Allies 'Betray' It in the Iran Conflict? From Italy to Türkiye—Which Countries Turned Their Backs? See the Full List.
ट्रम्प मैक्रों स्टार्मर, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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US Iran War Allies Refuse Support: पश्चिम एशिया में 28 फरवरी से जारी ईरान युद्ध ने वैश्विक कूटनीति के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। सुपरपावर अमेरिका जो आमतौर पर अपने नाटो सहयोगियों के दम पर युद्ध के मैदान में उतरता है इस बार अपनों के ही विरोध का सामना कर रहा है। कई महत्वपूर्ण सहयोगी देशों ने न केवल इस युद्ध में सीधे शामिल होने से इनकार कर दिया है बल्कि अमेरिका को अपनी जमीन और हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने तक की अनुमति नहीं दी है।

तुर्की और स्पेन

तुर्की, जो नाटो का एक अहम हिस्सा है, ने इस बार अमेरिका के हथियार बनने के बजाय मध्यस्थ की भूमिका निभाने का फैसला किया है। तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयर एर्दोगन ने कड़े शब्दों में कहा कि यह युद्ध इजराइल का है लेकिन इसकी भारी कीमत पूरी मानवता को चुकानी पड़ रही है। वहीं, स्पेन ने अपनी नीति और भी सख्त रखी है। स्पेनिश प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने युद्ध की शुरुआत में ही इसकी निंदा की थी और अमेरिकी सेना के लिए स्पेनिश हवाई क्षेत्र और सैन्य अड्डों के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है।

इटली का क्या है मत?

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाला रुख इटली का रहा है। इटली सरकार ने मिडिल ईस्ट की ओर जा रहे एक अमेरिकी सैन्य विमान को सिसली स्थित सिगोनेला एयर बेस पर उतरने की अनुमति नहीं दी। इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने इस कड़े फैसले का बचाव करते हुए कहा कि लैंडिंग के लिए कोई औपचारिक अनुमति नहीं मांगी गई थी और न ही इटली के मिलिट्री कमांड से कोई सलाह ली गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई नियमित रसद उड़ान नहीं थी जिसे बिना पूर्व सूचना के आने दिया जाए।

इराक युद्ध की गलतियों से लिया सबक ब्रिटेन

अमेरिका के सबसे पुराने साथी ब्रिटेन ने इस बार बहुत ही नपा-तुला रुख अपनाया है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने साफ कर दिया है कि ब्रिटेन अतीत में इराक युद्ध जैसी गलती को दोहराना नहीं चाहता। ब्रिटेन ने कहा है कि वह अमेरिका को अपने ठिकानों का इस्तेमाल केवल रक्षात्मक स्ट्राइक के लिए करने देगा न कि सीधे हमलों के लिए। हालांकि, रिपोर्टों के मुताबिक ब्रिटेन के RAF फेयरफोर्ड एयरबेस से कुछ अमेरिकी बॉम्बर विमान उड़ान भरते जरूर देखे गए हैं।

फ्रांस और जर्मनी

यूरोप के अन्य शक्तिशाली देश फ्रांस और जर्मनी भी युद्ध के विस्तार के पक्ष में नहीं हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने स्पष्ट किया कि यूरोप इस जंग का हिस्सा नहीं बनना चाहता और अभी सबसे जरूरी काम तनाव को कम करना है। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने भी इसी सुर में बात करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन किया जाना चाहिए।

दूसरी ओर, खाड़ी देश जैसे सऊदी अरब और यूएई सीधे युद्ध में शामिल होने से बच रहे हैं हालांकि वे अपने यहाँ स्थित अमेरिकी ठिकानों को काम करने की छूट दे रहे हैं।

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