ईरान के स्कूल पर अमेरिकी मिसाइल हमला… सैकड़ों मासूमों की मौत, क्या ट्रंप बनेंगे युद्ध अपराधी?
Iran School Attack: ईरान के स्कूल पर अमेरिकी मिसाइल हमले में 165 से अधिक लोगों की मौत हुई, जिनमें अधिकांश बच्चे थे। पुराने डेटा के कारण हुए इस हमले से ट्रंप प्रशासन पर युद्ध अपराध के आरोप लग रहे हैं।
- Written By: प्रिया सिंह
ईरान हमलों में सैकड़ों मासूमों की मौत, क्या ट्रंप बनेंगे युद्ध अपराधी? (सोर्स-सोशल मीडिया)
Missile Strike On Civilian On School: मानवता के नाम पर खुद को चैंपियन बताने वाले अमेरिका पर आज एक ऐसा दाग लगा है जिसे धो पाना मुश्किल होगा। ईरान के एक प्राथमिक विद्यालय पर हुए मिसाइल हमले ने पूरी दुनिया की आत्मा को झकझोर कर रख दिया है। नागरिक स्कूल पर मिसाइल हमला की इस घटना में मासूम बच्चों ने अपनी जान गंवाई है, जो सिर्फ शिक्षा पाने स्कूल गए थे। इस हमले ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों और युद्ध के नियमों पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
मासूम बच्चों पर बरसी मौत
28 फरवरी को ईरान के एक प्राइमरी स्कूल पर अमेरिका और इजरायल की ओर से विनाशकारी मिसाइल हमला किया गया। इस भीषण हमले में 165 से अधिक निर्दोष लोगों की जान चली गई जिनमें अधिकतर छोटे स्कूली बच्चे शामिल थे। शनिवार का दिन होने के कारण स्कूल परिसर छात्रों से भरा हुआ था और अचानक हुए धमाके ने सब खत्म कर दिया।
पुराने डेटा की घातक चूक
जांच में सामने आया है कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने हमले के लिए रक्षा खुफिया एजेंसी के पुराने डेटा का उपयोग किया। इस पुरानी जानकारी के कारण एक रिहायशी विद्यालय को गलती से सैन्य निशाना मानकर उस पर मिसाइल दाग दी गई। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार शुरुआती जांच के नतीजे इस पूरी तबाही के लिए सीधे तौर पर अमेरिका को जिम्मेदार ठहराते हैं।
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स्पष्ट थे नागरिकता के संकेत
सैटेलाइट तस्वीरों से साफ पता चलता है कि साल 2017 में ही स्कूल और सैन्य क्षेत्र के बीच दीवार बना दी गई थी। स्कूल की दीवारों पर चमकीले नीले और गुलाबी रंग के चित्र बने थे जो अंतरिक्ष से भी इसकी नागरिक पहचान दर्शाते थे। मौके पर मिले टोमाहॉक मिसाइल के टुकड़ों और वीडियो फुटेज ने अमेरिकी सेना की संलिप्तता को पूरी दुनिया के सामने बेनकाब किया है।
युद्ध अपराधों का बढ़ता घेरा
अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत स्कूलों और नागरिक ठिकानों को युद्ध के दौरान निशाना बनाना पूरी तरह से गैर-कानूनी और प्रतिबंधित है। इसी कारण अब अमेरिका के 45 से अधिक सीनेटरों ने राष्ट्रपति ट्रंप के प्रशासन से इस भीषण गलती पर जवाब मांगा है। पेंटागन ने मामले की जांच शुरू कर दी है लेकिन निर्दोष बच्चों की मौत ने अमेरिका की साख को नुकसान पहुंचाया है।
इंसाफ की पुकार और कानून
इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट के विधान के अनुसार जानबूझकर नागरिकों की हत्या करने पर आजीवन कारावास जैसी कड़ी सजा का प्रावधान है। हालांकि अमेरिका पर मुकदमा चलने की उम्मीद कम है फिर भी मानवाधिकार संगठन इसे मानवता के खिलाफ एक बड़ा अपराध बता रहे हैं। यह घटना साबित करती है कि युद्ध की आग में सबसे पहले उन मासूमों का भविष्य जलता है जिनका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं।
