ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस(सोर्स-सोशल मीडिया)
US Iran Peace Negotiations at Islamabad: इस्लामाबाद में चल रही यह बैठक बिना किसी बड़े नतीजे के पूरी तरह से विफल हो गई है। ईरान ने साफ कहा है कि इस अमेरिका-ईरान शांति वार्ता में वह किसी भी तरह के दबाव में नहीं झुकेगा। अब आगे का रास्ता तय करने की पूरी जिम्मेदारी अमेरिका और ईरान संघर्ष के तहत वाशिंगटन की है। दोनों देशों के बीच होरमुज़ जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ रहा है जो पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है।
Islamabad में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही यह महत्वपूर्ण शांति वार्ता पूरी तरह से विफल हो गई है। ईरान ने अमेरिका की उन सभी प्रमुख शर्तों को सिरे से खारिज कर दिया है जो उसने बातचीत में रखी थीं। तेहरान ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका द्वारा रखी गई सभी शर्तें पूरी तरह से गैर-कानूनी और अव्यावहारिक थीं।
ईरान की समाचार एजेंसी तसनीम के अनुसार अब समझौते की पूरी जिम्मेदारी अमेरिका के ही कंधों पर आ गई है। तेहरान ने साफ कहा है कि उसे किसी भी तरह के नए समझौते के लिए फिलहाल कोई जल्दबाजी नहीं है। वाशिंगटन को अब यथार्थवादी रुख अपनाना होगा क्योंकि ईरानी सरकार बिल्कुल भी दबाव में आकर नहीं झुकेगी।
ईरान ने चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य की वर्तमान स्थिति में अभी कोई भी बदलाव नहीं किया जाएगा। जब तक अमेरिका एक तर्कसंगत और उचित समझौते पर सहमत नहीं होता तब तक यह तनाव ऐसे ही बरकरार रहेगा। इस जलमार्ग से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है इसलिए यह बहुत ही महत्वपूर्ण है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि Islamabad में 21 घंटे चली लंबी बातचीत के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकला। उन्होंने इस पूरी विफलता का ठीकरा ईरान पर फोड़ते हुए कहा कि उसने परमाणु हथियार न बनाने की शर्त नहीं मानी। वेंस के अनुसार यह नया समझौता न होना अमेरिका से कहीं ज्यादा ईरान के लिए एक बहुत ही बुरी खबर है।
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि इस महत्वपूर्ण बातचीत के दौरान उनकी कई बार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात हुई। उन्होंने स्पष्ट किया है कि अमेरिका ने इस बैठक में अपनी रेड लाइन को पूरी तरह से साफ कर दिया है। वर्तमान में ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता के अगले दौर के लिए कोई भी नया समय निर्धारित नहीं किया गया है।
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Islamabad में आयोजित हुई यह बैठक एक दशक से भी अधिक समय में अमेरिका और ईरान के बीच पहली सीधी वार्ता थी। इस महत्वपूर्ण बैठक का मुख्य परिणाम दो सप्ताह से जारी युद्ध विराम को बनाए रखने के लिए बहुत ही जरूरी माना जा रहा था। हालांकि कोई ठोस नतीजा न निकलने के कारण अब क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर चिंता काफी ज्यादा बढ़ गई है।