US Iran Deal: यूएस ईरान डील में छिपे बैक चैनल वादे, भविष्य की बातचीत के लिए शर्तें रखी गईं धुंधली
Secret US Iran Deal: अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया समझौते का मसौदा जानबूझकर धुंधला रखा गया है। इसका असली मकसद विवाद तुरंत सुलझाने के बजाय भविष्य की बातचीत का रास्ता आसान बनाना है।
- Written By: प्रिया सिंह
अमेरिका ईरान पीस डील (सोर्स-सोशल मीडिया)
Secret US Iran Deal Update: अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में एक नया राजनीतिक समझौता हुआ है जिसके कई कूटनीतिक मायने हैं। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार इस समझौते के मसौदे को जानबूझकर बहुत व्यापक और पूरी तरह धुंधला रखा गया है। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों को तुरंत सुलझाना बिल्कुल नहीं है। बल्कि यह आने वाले समय में भविष्य की तकनीकी वार्ताओं के लिए एक सकारात्मक और बहुत ही बेहतर माहौल तैयार करेगा।
अमेरिकी अधिकारियों ने इस हालिया दस्तावेज को अविश्वसनीय रूप से अस्पष्ट और महज एक राजनीतिक दस्तावेज करार दिया है। उनका कहना है कि इस लिखित टेक्स्ट में ईरान की ओर से बैक चैनल से किए गए वादों का कोई जिक्र नहीं है। इस अस्पष्ट भाषा से ईरान को भी फायदा होगा और वह इसे अपनी जनता के सामने बहुत बेहतर तरीके से पेश कर सकेगा। यह समझौता किसी अंतिम फैसले के बजाय आगे की कूटनीतिक बातचीत और शांति प्रयासों की बस एक महत्वपूर्ण शुरुआत है।
राजनीतिक और कूटनीतिक समझौता
एक मामले से जुड़े अधिकारी ने साफ शब्दों में कहा कि लोगों को इस भाषा को बहुत गहराई से नहीं समझना चाहिए। इस दस्तावेज से कहीं ज्यादा अहम वह आपसी समझ है जो अमेरिका और ईरान दोनों देशों के बीच अब बन गई है। यह पूरी तरह से एक राजनीतिक समझौता माना जा रहा है जो भविष्य के कूटनीतिक रास्तों को फिर से खोलने का काम करेगा।
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प्रतिबंधों पर बड़ा फैसला
अमेरिका का कहना है कि प्रतिबंधों में ढील और परमाणु समझौता जैसे बड़े मुद्दे इस एमओयू के तहत तुरंत लागू नहीं होंगे। फ्रीज किए गए फंड तक पहुंच जैसे संवेदनशील मामले भविष्य में होने वाली बातचीत की प्रगति से पूरी तरह जुड़े हुए हैं। जैसे-जैसे दोनों देश आगे बढ़ेंगे और अपनी तय शर्तों का ईमानदारी से पालन करेंगे वैसे ही इन पर कोई ठोस फैसला लिया जाएगा।
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बैक चैनल के अहम वादे
इस लिखित समझौते में उन सभी महत्वपूर्ण वादों को पूरी तरह छुपा लिया गया है जो पर्दे के पीछे से दोनों ने किए हैं। इसका सीधा मतलब है कि दुनिया को जो भी दस्तावेज दिखाया जा रहा है उसमें पूरी असलियत बिल्कुल भी मौजूद नहीं है। दोनों देशों ने आपसी सहमति से कुछ ऐसी कूटनीतिक शर्तें तय की हैं जिन्हें अभी अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक मंच पर नहीं लाया जा रहा है।
