US Iran Peace Talks: इस्लामाबाद में शांति की आखिरी कोशिश, हां-ना के बीच पाक पहुंच रहा अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल

Us Delegation Visit Pakistan: इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता शुरू होने वाली है। ट्रंप ने डील न होने पर ईरान के पावर प्लांट और बुनियादी ढांचे को नष्ट करने की धमकी दी है।
US-Iran Peace Talks: A Final Attempt at Peace in Islamabad—Amidst Uncertainty, US Delegation Arrives in Pakistan
मुनीर, जेडी वैन्स और इशाक डार, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Us Delegation Visit Pakistan Iran Peace Talks: पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच दुनिया की नजरें एक बार फिर पाकिस्तान की राजधानी पर टिकी हैं। अमेरिका का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ईरान के साथ दूसरे दौर की वार्ता के लिए इस्लामाबाद पहुंचने वाला है। इस महत्वपूर्ण बैठक का मुख्य उद्देश्य वर्तमान में जारी दो सप्ताह के युद्धविराम की अवधि को बढ़ाना और क्षेत्र को एक बड़े विनाशकारी युद्ध से बचाना है।

ट्रंप की 'विनाशकारी' चेतावनी

इस कूटनीतिक प्रयास के दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा रुख बरकरार है। ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस बार कोई ठोस समझौता (Deal) नहीं होता है तो अमेरिका ईरान को पूरी तरह तबाह कर देगा। ट्रंप की इस धमकी में विशेष रूप से ईरान के पावर प्लांट्स और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की बात कही गई है, जिसने वैश्विक स्तर पर चिंता पैदा कर दी है।

क्यों विफल रही थी पहले दौर की वार्ता?

इससे पहले 11-12 अप्रैल को इस्लामाबाद में ही पहले दौर की शांति वार्ता आयोजित की गई थी। दशकों में पहली बार हुई इस उच्चस्तरीय सीधी बातचीत के बावजूद, कोई नतीजा नहीं निकल सका था। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच 'सुरक्षा' और 'रियायतों' को लेकर गहरे मतभेद थे। जहां अमेरिका ने परमाणु प्रतिबंधों और क्षेत्रीय स्थिरता को प्राथमिकता दी, वहीं ईरान ने पहले प्रतिबंधों को हटाने और सैन्य दबाव खत्म करने की शर्त रखी। अविश्वास इतना गहरा था कि किसी भी सहमति वाले बिंदु को अंतिम समझौते में नहीं बदला जा सका।

जेडी वेंस बनाम मोहम्मद बागेर गालिबाफ

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पहले दौर की विफलता का ठीकरा तेहरान पर फोड़ते हुए कहा कि ईरान ने वाशिंगटन के 'अंतिम और सर्वोत्तम प्रस्ताव' (Final and Best Offer) को ठुकरा दिया था। वेंस के अनुसार, मुख्य विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बना हुआ है। वहीं दूसरी ओर, ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने अमेरिका पर अविश्वास व्यक्त किया है। गालिबाफ का कहना है कि वार्ता के दौरान वाशिंगटन तेहरान का भरोसा जीतने में 'असमर्थ' रहा। ईरान का आरोप है कि अमेरिका की मांगें 'अनुचित' और 'अत्यधिक' हैं जिसने बातचीत की प्रगति को रोक दिया है।

बढ़ता सैन्य दबाव और नाकेबंदी

इस्लामाबाद वार्ता की विफलता का परिणाम तनाव कम होने के बजाय तुरंत सैन्य वृद्धि के रूप में सामने आया है। अमेरिका ने दबाव बढ़ाते हुए ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी कर दी है। जवाब में ईरान ने भी अपनी बयानबाजी तेज कर दी है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपने नियंत्रण का लाभ उठाने की रणनीतिक कार्रवाई शुरू की है।

समुद्र में बढ़ती आमने-सामने की झड़पों ने भविष्य की वार्ताओं की राह को और कठिन बना दिया है। अब पूरी दुनिया यह देख रही है कि क्या इस्लामाबाद का यह दूसरा दौर शांति ला पाएगा या क्षेत्र एक महायुद्ध की ओर बढ़ जाएगा।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com