ईरान युद्ध पर ट्रंप का बड़ा दांव, शांति के लिए अब खुद ईरानी नेताओं से मिलने को तैयार, क्या टल जाएगा महायुद्ध?

Trump Ready Meet Iranian Leaders: ट्रंप ने ईरान के साथ संघर्ष खत्म करने के लिए बड़ा संकेत दिया है। इस्लामाबाद वार्ता से पहले ट्रंप ने ईरानी नेताओं से सीधे मिलने की इच्छा जताई है।
Trump's Big Gamble on the Iran War: Now Ready to Meet Iranian Leaders Personally for Peace Will a Major War Be Averted?
डोनाल्ड ट्रंप, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Trump Ready Meet Iranian Leaders Peace Talks: ईरान और अमेरिका के बीच गहराते युद्ध के बादलों के बीच शांति की एक नई किरण दिखाई दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा रुख छोड़ते हुए अब बातचीत के जरिए संघर्ष सुलझाने के स्पष्ट संकेत दिए हैं। ताजा जानकारी के मुताबिक, ट्रंप ने घोषणा की है कि यदि पाकिस्तान के इस्लामाबाद में होने वाली दूसरे दौर की वार्ता सफल रहती है तो वह शांति की खातिर ईरानी नेताओं के साथ आमने-सामने बैठने के लिए भी तैयार हैं।

इस्लामाबाद के पहुंच रहा अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल

इस ऐतिहासिक शांति वार्ता को सफल बनाने के लिए अमेरिका ने अपनी भारी-भरकम टीम मैदान में उतार दी है। व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल पाक की राजधानी इस्लामाबाद के लिए उड़ान भर चुका है और कुछ घंटों में पहुंचने वाला है। इस टीम में ट्रंप के करीबी और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ जेरेड कुशनर भी शामिल हैं। ट्रंप ने रविवार को इस बात की तस्दीक की कि ये नेता रात तक इस्लामाबाद पहुंच जाएंगे। गौरतलब है कि पहले जेडी वेंस की यात्रा को लेकर संशय था लेकिन बाद में व्हाइट हाउस ने उनके शामिल होने की पुष्टि की।

ईरान का अड़ियल रुख

भले ही अमेरिका बातचीत की मेज पर आने के लिए उतावला दिख रहा हो लेकिन ईरान अभी भी 'ऊहापोह' की स्थिति में बना हुआ है। ईरानी सरकारी मीडिया के संकेतों के अनुसार, तेहरान इस वार्ता में शामिल न होने की योजना बना रहा है। ईरान का आरोप है कि अमेरिका की मांगें "अवास्तविक" हैं और राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही सीजफायर के नियमों का उल्लंघन कर चुके हैं। इसके अलावा, होर्मुज के बाहर समुद्री नाकेबंदी हटाने से अमेरिका के इनकार ने ईरान के अविश्वास को और गहरा कर दिया है।

परमाणु कार्यक्रम पर ट्रंप की दो-टूक

डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि वह बातचीत के विरोधी नहीं हैं, लेकिन अमेरिका के लिए ईरान का परमाणु कार्यक्रम सबसे बड़ा मुद्दा बना रहेगा। ट्रंप ने कड़े शब्दों में कहा है कि यह पूरी तरह साफ है कि ईरान के पास कोई परमाणु हथियार नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर ईरानी नेता मिलना चाहते हैं, तो उन्हें इसमें कोई दिक्कत नहीं है, क्योंकि शांति के लिए संवाद जरूरी है।

22 अप्रैल की समयसीमा

यह पूरी कवायद इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच हुए वर्तमान सीजफायर की समयसीमा 22 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रही है। यदि यह वार्ता विफल रहती है तो युद्ध फिर से शुरू होने की आशंका है। जब ट्रंप से वार्ता की विफलता के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह इस पर अभी बात नहीं करना चाहते लेकिन स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस्लामाबाद पर टिकी हैं कि क्या वहां शांति का कोई रास्ता निकल पाएगा या नहीं।

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