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UNSC में ईरान के खिलाफ प्रस्ताव पास… रूस और चीन ने नहीं दिया साथ, भारत भी रहा शामिल

UNSC Iran Resolution: UNSC ने खाड़ी देशों पर ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों की निंदा का प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें रूस और चीन ने वीटो का इस्तेमाल न कर ईरान को अकेला छोड़ दिया।

  • Written By: प्रिया सिंह
Updated On: Mar 12, 2026 | 02:50 PM

UNSC में ईरान के खिलाफ प्रस्ताव पास (सोर्स-सोशल मीडिया)

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India Co-Sponsored UNSC Resolution: आज के दौर में अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच पर समीकरण बड़ी तेजी से बदलते जा रहे हैं और हर देश अपने हितों को प्राथमिकता दे रहा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के खिलाफ एक बेहद कड़ा निंदा प्रस्ताव पास हुआ है जो तेहरान के लिए एक बहुत बड़ा कूटनीतिक झटका माना जा रहा है। इस बार रूस और चीन जैसे पुराने सहयोगियों ने भी ईरान को बचाने के लिए अपने ‘ब्रह्मास्त्र’ यानी वीटो पावर का इस्तेमाल नहीं किया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव को सह-प्रायोजित के जरिए नई दिल्ली ने भी साफ कर दिया है कि वह क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय शांति के पक्ष में मजबूती से खड़ा है।

सुरक्षा परिषद का कड़ा रुख

सुरक्षा परिषद ने खाड़ी देशों पर ईरान द्वारा किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों और चार्टर का खुला उल्लंघन बताया है। बहरीन की ओर से पेश किए गए इस प्रस्ताव में ईरान से इन हमलों को तुरंत रोकने और क्षेत्र में शांति बहाली की दिशा में काम करने की मांग की गई है।

प्रस्ताव में विशेष रूप से बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, जॉर्डन और यूएई की संप्रभुता और उनकी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने पर काफी जोर दिया गया है। परिषद ने माना कि नागरिक बुनियादी ढांचे और वाणिज्यिक जहाजों को जानबूझकर निशाना बनाना वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए एक बहुत बड़ा और गंभीर खतरा है।

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ईरान ने इस प्रस्ताव के पारित होने पर अपनी गहरी नाराजगी जताई है और इसे सुरक्षा परिषद के मंच का खुलेआम दुरुपयोग बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। हालांकि प्रस्ताव के पक्ष में पड़े 13 मतों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस सैन्य तनाव और हिंसा को और अधिक बर्दाश्त नहीं करेगा।

रूस और चीन की बेरुखी

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि रूस और चीन ने ईरान के खिलाफ वीटो का इस्तेमाल करने के बजाय मतदान की प्रक्रिया से पूरी तरह दूरी बनाए रखी। आमतौर पर ईरान का समर्थन करने वाले इन बड़े देशों के इस रुख को अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बहुत बड़े और अप्रत्याशित बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

इससे पहले रूस ने सभी पक्षों से अपनी सैन्य गतिविधियां तुरंत रोकने के लिए अपना एक अलग मसौदा प्रस्ताव भी पेश किया था लेकिन उसे अमेरिका ने वीटो कर दिया। अमेरिका और लातविया ने रूस के प्रस्ताव के विरोध में मतदान किया जबकि ब्रिटेन और फ्रांस सहित परिषद के नौ अन्य सदस्यों ने इस मतदान में हिस्सा नहीं लिया।

ईरान को शायद यह उम्मीद थी कि उसके पुराने साथी संकट की इस घड़ी में उसे कूटनीतिक सुरक्षा प्रदान करेंगे लेकिन रूस और चीन की चुप्पी ने सबको चौंका दिया। इन दोनों महाशक्तियों के इस कदम ने तेहरान को वैश्विक मंच पर काफी हद तक अकेला कर दिया है और उसकी अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों को पहले से अधिक बढ़ा दिया है।

भारत और पाकिस्तान का रुख

भारत ने इस निंदा प्रस्ताव का न केवल समर्थन किया बल्कि वह इसे को-स्पॉन्सर करने वाले दुनिया के 135 देशों की सूची में भी सक्रिय रूप से शामिल रहा। भारत का यह कड़ा कदम दर्शाता है कि वह खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और वहां रहने वाले अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर कितना अधिक गंभीर है।

यह भी पढ़ें: ओमान के सलालाह पोर्ट पर ईरान का भीषण ड्रोन हमला, तेल टैंकों को बनाया निशाना, खाड़ी में बढ़ा तनाव

पड़ोसी देश पाकिस्तान ने भी ईरान के खिलाफ वोट देते हुए बताया कि संयुक्त अरब अमीरात पर हुए हालिया हमलों में उसके दो निर्दोष नागरिकों की जान चली गई है। पाकिस्तान के राजदूत ने कहा कि खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों पाकिस्तानी नागरिक अब इन हमलों के कारण गहरे डर और असुरक्षा के साये में जीने को मजबूर हैं।

फ्रांस ने भी इस पूरे तनाव के लिए सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराते हुए उसके बढ़ते परमाणु खतरों और आक्रामक गतिविधियों पर अपनी गहरी चिंता जाहिर की है। फिलहाल सुरक्षा परिषद ने मध्य पूर्व में शांति के लिए क्षेत्रीय देशों द्वारा किए जा रहे मध्यस्थता के प्रयासों को स्वीकार किया है और समर्थन दोहराया है।

Unsc passes resolution against iran russia and china abstain india supports the move

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Published On: Mar 12, 2026 | 02:50 PM

Topics:  

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  • Russia
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