यूएई ने पाकिस्तान के इस्लामाबाद एयरपोर्ट का मैनेजमेंट प्रोजेक्ट छोड़ा (सोर्स- सोशल मीडिया)
UAE Pulls Back to Manage Pakistan Islamabad Airport: शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत यात्रा और इसके बाद हुए घटनाक्रमों से दक्षिण एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहे हैं, खासकर पाकिस्तान और यूएई के संबंधों में। यूएई ने इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के ऑपरेशन को लेकर अपनी योजना रद्द कर दी है, और यह घटनाक्रम एक बड़े भू-राजनीतिक संदर्भ में घटित हो रहा है।
यूएई और पाकिस्तान के बीच दशकों से मजबूत व्यापारिक और रक्षा संबंध रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों में इन संबंधों में खटास आई है। पाकिस्तान के आर्थिक और प्रशासनिक संकट, सुरक्षा चिंताएं, और वहां के पुराने बुनियादी ढांचे ने दोनों देशों के बीच सहयोग को प्रभावित किया है। इसके अलावा, पाकिस्तान के सरकारी उद्यमों का निजीकरण और आर्थिक मुद्दे भी यूएई को इस्लामाबाद के साथ अपनी योजनाओं को फिर से समीक्षा करने के लिए मजबूर कर सकते हैं।
भारत और यूएई के संबंधों में पिछले कुछ सालों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। यूएई ने हाल ही में भारतीय कैदियों की रिहाई को मंजूरी दी और दोनों देशों ने रक्षा सहयोग के लिए नई दिशा में कदम बढ़ाए हैं। राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद की भारत यात्रा के दौरान किए गए रक्षा समझौतों से यह स्पष्ट है कि यूएई अब भारत को अपने रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है, और दोनों देशों के रिश्ते अब एक अधिक महत्वाकांक्षी और बहुआयामी चरण में प्रवेश कर रहे हैं। इससे पाकिस्तान के लिए भी संकेत मिलते हैं कि यूएई की प्राथमिकताएं बदल रही हैं, और वह अब भारत के साथ अपनी साझेदारी को और मजबूत करना चाहता है।
यूएई और सऊदी अरब के बीच तनाव भी बढ़ रहा है, खासकर यमन युद्ध में दोनों देशों की अलग-अलग नीतियों के कारण। यूएई ने भारत के साथ रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जबकि पाकिस्तान सऊदी अरब के साथ मिलकर “इस्लामिक नाटो” बनाने की योजना पर काम कर रहा है। यह स्थिति पाकिस्तान के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि सऊदी अरब पर उसकी निर्भरता बढ़ रही है, जबकि यूएई भारत के साथ अपने संबंधों को गहरा कर रहा है।
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इन घटनाओं से दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक समीकरणों में बदलाव देखने को मिल रहा है। पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका है कि यूएई, जो कभी उसके सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक था, अब उसके साथ रणनीतिक संबंधों को ठंडा कर रहा है और भारत के साथ अपने संबंधों को मजबूत कर रहा है। यह पाकिस्तान को आर्थिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से एक नई चुनौती दे सकता है, क्योंकि वह अपनी विदेशी नीति को संतुलित करने में कठिनाइयों का सामना कर सकता है।