वक्फ बोर्ड की गहमागहमी के बीच UAE का बड़ा दांव, फोटो ( सो. सोशल मीडिया )
दुबई: भारत सरकार द्वारा लाए गए नए वक्फ बोर्ड बिल को लेकर देश के कुछ मुसलमानों ने मोदी सरकार पर धार्मिक भेदभाव का आरोप लगाया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खासकर प्रमुख मुस्लिम देशों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। दुनिया के शक्तिशाली मुस्लिम देशों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर पूरा भरोसा है। यही वजह है कि वे भारत के साथ अपने संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने और सहयोग को बढ़ावा देने में सक्रिय हैं।
इसी बीच, वक्फ बोर्ड को लेकर भारत में चल रही बहस के दौरान संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के एक सांसद ने कहा है कि वर्तमान समय भारत और यूएई के लिए आपसी संबंधों में निवेश करने का सबसे उपयुक्त समय है, क्योंकि दोनों देशों के पास दूरदर्शी नेतृत्व मौजूद है।
यूएई की रक्षा, आंतरिक और विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष अली राशिद अल नुएमी ने दुबई में आयोजित वैश्विक न्याय, प्रेम और शांति शिखर सम्मेलन में कहा कि दुनिया की चुनौतियों से निपटने के लिए अलग-थलग रहना कोई समाधान नहीं है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सभी देशों को मिलकर काम करना चाहिए। अल नुएमी ने कहा कि हमारे पास ऐसा नेतृत्व है जो न केवल समस्याओं को भली-भांति समझता है, बल्कि संभावनाओं को भी पहचानने की क्षमता रखता है।
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उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करना और उपलब्ध अवसरों का अधिकतम लाभ उठाना बेहद ज़रूरी है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जो पुरानी वैश्विक व्यवस्था बनी थी, अब वह पीछे छूट चुकी है और हम एक बदलाव के मोड़ पर खड़े हैं।
शिखर सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए नुएमी ने कहा, “अगर हम अपने समुदायों और अर्थव्यवस्थाओं को अलग-थलग रखने में लगे रहेंगे, तो इसका नुकसान हमें ही होगा। हमें एक साथ आकर अग्रणी बनने के लिए एक रास्ता तैयार करना होगा। मुझे विश्वास है कि यह संभव है।” मॉरीशस की पूर्व और पहली राष्ट्रपति, अमीना गुरीब-फकीम ने कहा कि यह शिखर सम्मेलन एक ऐसे समय में हो रहा है जब असमानताओं से निपटने की तत्काल आवश्यकता है। फकीम ने कहा, “इस अनिश्चित काल में, ‘संपन्न’ और ‘वंचित’ के बीच की खाई बढ़ती जा रही है। मेरे लिए, असमानता सबसे गंभीर मुद्दों में से एक है, जिसका शीघ्र समाधान आवश्यक है।”
उन्होंने यह भी कहा कि न्याय, शांति और प्रेम वे बातें हैं जिन्हें महात्मा गांधी ने बहुत पहले मानव चेतना में समाहित किया था। फकीम ने कहा, “हमें बस इन मूल्यों को आज के समय में फिर से अपनाने की जरूरत है। इसलिए, हमें इस संवाद को जल्दी शुरू करने की आवश्यकता है।”