ईरान पर UAE का साइलेंट एक्शन, बिना एक भी हथियार चलाए तेहरान से ले लिया अपना बदला

UAE Iran Conflict: यूएई ने ईरान और हिजबुल्लाह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया, उनके फंडिंग नेटवर्क को ध्वस्त किया, जिससे संगठन कमजोर और ईरान को अप्रत्यक्ष संदेश मिला।
UAE Action Against Iran's Proxy Hezbollah
यूएई ने ईरान और हिजबुल्लाह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया (सोर्स- सोशल मीडिया)
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UAE Action Against Iran's Proxy Hezbollah: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने ईरान और उसके प्रॉक्सी संगठन हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है, वह भी बिना हथियार या मिसाइल का इस्तेमाल किए। 20 मार्च, शुक्रवार को यूएई की सुरक्षा एजेंसी ने ईरान और हिजबुल्लाह से जुड़े पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया। ये सभी सदस्य दुबई और अबू धाबी में रहकर हिजबुल्लाह और ईरान के बीच फंडिंग का नेटवर्क चला रहे थे। 

यूएई की एजेंसी का दावा है कि इन गिरफ्तारियों से एक अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क ध्वस्त हो गया है। गिरफ्तार किए गए सदस्य मनी लॉन्ड्रिंग और आतंक को बढ़ावा देने के उद्देश्य से काम कर रहे थे। उनका लक्ष्य दुनिया की अर्थव्यवस्था में सेंध लगाकर युद्ध के समय आर्थिक अस्थिरता पैदा करना था। अगर ये सफल हो जाते, तो इससे यूएई की अर्थव्यवस्था को भी गंभीर नुकसान पहुँच सकता था।

हिजबुल्लाह और ईरान दोनों को बड़ा झटका

इस कार्रवाई से हिजबुल्लाह और ईरान दोनों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि फिलहाल हिजबुल्लाह ईरान की ओर से इजराइल के खिलाफ संघर्ष में लगा हुआ है। जानकारी के मुताबिक, यूएई में हिजबुल्लाह लंबे समय से सक्रिय रहा है। हाल के वर्षों में कई हिजबुल्लाह नेता यूएई का दौरा कर चुके हैं।  हालांकि, यूएई ने 2016 में अमेरिका के दबाव में हिजबुल्लाह को आतंकी संगठन घोषित किया था। इसके बावजूद संगठन ने यहां अपना नेटवर्क बनाए रखा। यूएई ने पर्दे के पीछे हिजबुल्लाह के फंडिंग और लेन-देन में भूमिका निभाई है, जिसमें ईरान को तेल की अवैध बिक्री में मदद करना भी शामिल है।

ईरान के हमलों से UAE नाराज

हाल ही में ईरान की ओर से यूएई पर किए गए दबाव और हमलों के बाद अबू धाबी ने नीति बदली है। मिसाइल या सीधा हमला न करते हुए, यूएई अब अपने खुफिया और आर्थिक संसाधनों के जरिए ईरान को नुकसान पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

हिजबुल्लाह के फंडिंग नेटवर्क पर यह कार्रवाई संगठन की लड़ाई क्षमता को कमजोर कर सकती है और ईरान को भी संदेश देती है कि यूएई अब अप्रत्यक्ष रूप से जवाबी कदम उठा रहा है। इस कदम से यह स्पष्ट होता है कि यूएई ईरान और उसके प्रॉक्सी संगठनों के खिलाफ बिना प्रत्यक्ष सैन्य संघर्ष के भी प्रभावी प्रतिक्रिया दे सकता है, जो मध्यपूर्व की राजनीति और आर्थिक खेल में नया मोड़ जोड़ सकता है।

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