ट्रंप को ब्रिटेन-फ्रांस से तगड़ा झटका, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Trump Hormuz Crisis UK France Summit: होर्मुज को लेकर जारी वैश्विक तनाव के बीच अब यूरोप की तरफ से एक बड़ा और स्वतंत्र कूटनीतिक कदम सामने आया है। ब्रिटेन और फ्रांस ने मिलकर इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को फिर से खोलने और वैश्विक शिपिंग को सुरक्षित बनाने के लिए एक व्यापक मल्टीनेशनल प्लान तैयार करना शुरू कर दिया है।
इस दिशा में एक निर्णायक कदम उठाते हुए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने 40 से अधिक देशों की एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय समिट बुलाने का आधिकारिक ऐलान किया है।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इस संकट के वैश्विक आर्थिक प्रभाव पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि होर्मुज स्ट्रेट का बंद होना पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए विनाशकारी साबित हो रहा है।
स्टार्मर के अनुसार, ग्लोबल शिपिंग में आने वाली बाधा का सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ रहा है, जिससे महंगाई और ‘कॉस्ट ऑफ लिविंग’ (जीवन यापन की लागत) का संकट गहरा गया है। इसी आर्थिक दबाव को कम करने के लिए ब्रिटेन और फ्रांस एक समन्वित और स्वतंत्र योजना पर काम कर रहे हैं ताकि समुद्री आवाजाही को सुचारू रखा जा सके।
यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति से पूरी तरह अलग है। जहां ट्रंप होर्मुज की सैन्य नाकेबंदी (Blockade) की बात कर रहे हैं और दावा कर रहे थे कि सहयोगी देश उनके साथ हैं, वहीं ब्रिटेन और फ्रांस ने इस सैन्य रुख से खुद को अलग कर लिया है। ब्रिटेन ने पहले ही साफ कर दिया था कि वह न तो किसी ब्लॉकेड का समर्थन करेगा और न ही ईरान के खिलाफ किसी सैन्य कार्रवाई में प्रत्यक्ष रूप से हिस्सा लेगा।
किएर स्टार्मर ने बीबीसी (BBC) से बातचीत में दोहराया कि उनका प्राथमिक फोकस सिर्फ और सिर्फ इस समुद्री रास्ते को खुलवाने पर है, न कि किसी नई जंग का हिस्सा बनने पर। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना किसी ‘स्पष्ट कानूनी आधार’ और ठोस अंतरराष्ट्रीय योजना के ब्रिटेन किसी भी सैन्य कदम का हिस्सा नहीं बनेगा।
हालांकि, ब्रिटेन के माइनस्वीपर जहाज पहले से ही खाड़ी क्षेत्र में तैनात हैं लेकिन स्टार्मर ने स्पष्ट किया कि उनकी भूमिका केवल समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखने और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग को सुचारू बनाए रखने तक सीमित है न कि युद्ध लड़ने के लिए।
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40 देशों की इस प्रस्तावित समिट से यह संकेत मिलता है कि विश्व के कई बड़े देश होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ते सैन्य तनाव से चिंतित हैं। जहां अमेरिका दबाव और सैन्य शक्ति के माध्यम से समाधान चाहता है, वहीं यूरोपीय शक्तियां कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्राथमिकता दे रही हैं। यह समिट इस बात का प्रमाण है कि वैश्विक समुदाय किसी भी बड़े सैन्य टकराव से बचना चाहता है और आर्थिक स्थिरता की बहाली के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाश रहा है।