ट्रंप का बड़ा खुलासा: इजरायल ने मुझे ईरान के खिलाफ नहीं उकसाया, परमाणु हथियारों पर दी सीधी चेतावनी

Trump Denies Israeli Influence On Iran: ट्रंप ने उन दावों को खारिज कर दिया है कि इजरायल उन्हें ईरान के साथ युद्ध के लिए भड़का रहा है। ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और फेक न्यूज पर भी प्रहार किया।
Trump's Major Revelation: Israel Did Not Incite Me Against Iran; Issued a Direct Warning Regarding Nuclear Weapons
डोनाल्ड ट्रंप, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Trump Denies Israeli Influence On Iran Nuclear Policy: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के प्रति अपनी विदेश नीति और इजरायल के साथ अपने संबंधों को लेकर एक बड़ा बयान जारी किया है। सोमवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक लंबी पोस्ट साझा करते हुए ट्रंप ने उन सभी अटकलों पर विराम लगा दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि इजरायल उन्हें ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए उकसा रहा है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है और कूटनीतिक गलियारों में कई तरह की अफवाहें तैर रही हैं।

इजरायली दबाव के दावों को बताया 'फेक न्यूज'

हाल ही में कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फरवरी के अंत में ट्रंप पर ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य कार्रवाई शुरू करने के लिए दबाव डाला था। ट्रंप ने इन खबरों को पूरी तरह से फर्जी और आधारहीन करार दिया है। उन्होंने मीडिया पर निशाना साधते हुए कहा कि वे 'फेक न्यूज' फैलाने वालों पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं करते हैं। ट्रंप ने आरोप लगाया कि मीडिया द्वारा कही जाने वाली 90% बातें केवल झूठ और मनगढ़ंत कहानियां होती हैं। उन्होंने अपनी बात को पुख्ता करने के लिए 2020 के अमेरिकी चुनाव और वेनेजुएला के चुनावी नतीजों का उदाहरण देते हुए मीडिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।

ईरान को परमाणु शक्ति बनने से रोकना क्यों जरूरी?

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान को कभी भी परमाणु संपन्न राष्ट्र नहीं होने दिया जा सकता। उन्होंने अपने इस तर्क के समर्थन में 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा इजरायल पर किए गए अचानक हमले का जिक्र किया। ट्रंप के अनुसार, इस तरह की घटनाएं यह साबित करती हैं कि यदि ईरान के पास परमाणु हथियार आते हैं तो यह न केवल इजरायल बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन जाएगा।

संकट में इस्लामाबाद वार्ता

ट्रंप का यह बयान इस्लामाबाद में होने वाले दूसरे दौर की शांति वार्ताओं के बीच सामने आया है। जहां एक ओर अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के पाकिस्तान पहुँचने की संभावना है, वहीं ईरान इस वार्ता से दूरी बनाता दिख रहा है। ईरान का मानना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिका द्वारा की गई नाकेबंदी युद्धविराम का उल्लंघन है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने दो-टूक शब्दों में कहा है कि यद्यपि वे संवाद कर रहे हैं लेकिन उन्हें अमेरिका पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है।

ईरान के भविष्य पर ट्रंप की राय

अपनी बात को समाप्त करते हुए ट्रंप ने ईरान के भविष्य को लेकर एक सकारात्मक संभावना भी जताई। उन्होंने कहा कि यदि ईरान का नया नेतृत्व "समझदार" है, तो देश का भविष्य अत्यंत 'उज्ज्वल और समृद्ध' हो सकता है। हालांकि, वर्तमान परिस्थितियों और कूटनीतिक गतिरोध को देखते हुए यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ईरान और अमेरिका के बीच विश्वास की बहाली संभव हो पाती है या क्षेत्र एक और बड़े संघर्ष की ओर बढ़ेगा।

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