

Historic Trump China Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों तीन दिवसीय चीन दौरे पर हैं। इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच बहुत बड़ी रणनीतिक सहमति बनी है। ट्रंप ने दावा किया है कि उनकी इस विस्तृत बातचीत के बाद चीन ने बहुत बड़ा फैसला लिया है। अब बीजिंग प्रशासन ईरान को भविष्य में किसी भी तरह के सैन्य उपकरण या हथियार नहीं बेचेगा।
यह ऐतिहासिक फैसला मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव के बीच पूरी दुनिया के लिए काफी महत्वपूर्ण है। ईरान और चीन के बीच बहुत पुराने और गहरे व्यापारिक के साथ-साथ सैन्य संबंध भी रहे हैं। लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार अब चीन ईरान के साथ अपने संबंधों को सिर्फ तेल तक सीमित रखेगा। इस ऐतिहासिक कदम से अमेरिका और चीन के बीच आने वाले समय में व्यापारिक रिश्ते भी बेहतर होंगे।
डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए एक विशेष इंटरव्यू में इस अहम बात की पूरी तरह से पुष्टि की है। उन्होंने साफ तौर पर बताया कि हथियार न देने के बावजूद चीन ईरान से कच्चा तेल खरीदता रहेगा। चीन को अपनी विशाल ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए भारी मात्रा में कच्चे तेल की आवश्यकता होती है। आंकड़ों के अनुसार चीन ने 2025 और 2026 की पहली तिमाही में बहुत ही भारी मात्रा में तेल खरीदा था। उसने ईरान से रोजाना लगभग 14 लाख बैरल कच्चे तेल की बहुत बड़ी खरीददारी लगातार जारी रखी है। यह चीन के कुल आयात का 12 से 15 प्रतिशत और ईरान के कुल तेल निर्यात का 90 प्रतिशत हिस्सा है।
इस अहम दौरे पर अमेरिका और चीन के बीच विमानन क्षेत्र में एक और बहुत बड़ा व्यापारिक समझौता हुआ है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिकी कंपनी बोइंग से 200 बड़े विमान खरीदने की अपनी सहमति दे दी है। ट्रंप के अनुसार यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती और नई नौकरियों के लिए एक बहुत ही बड़ा कदम है। अमेरिकी विमान निर्माता कंपनी बोइंग इस दौरे पर शुरुआत में 150 विमानों का ऑर्डर ही प्राप्त करना चाहती थी। लेकिन चीनी प्रशासन ने सभी को चौंकाते हुए उम्मीद से कहीं अधिक 200 बड़े विमानों का शानदार ऑर्डर दिया है। इस समझौते के समय बोइंग के सीईओ केली ऑर्टबर्ग भी अहम यात्रा में राष्ट्रपति ट्रंप के साथ मौजूद रहे हैं।
व्हाइट हाउस के अनुसार दोनों विश्व नेताओं ने अमेरिका से कच्चा तेल खरीदने के अहम मुद्दे पर भी चर्चा की। चीन ने ट्रेड वॉर के कारण मई 2025 में पूरी तरह से अमेरिकी कच्चे तेल की खरीददारी को बंद कर दिया था। उस समय ट्रेड वॉर के बीच चीन ने अमेरिकी क्रूड ऑयल पर 20 प्रतिशत टैरिफ लगाकर बहुत बड़ा झटका दिया था।