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ट्रंप का बड़ा दावा: चीन ने चुराया 22 करोड़ अमेरिकी वोटरों का डेटा, FBI और CIA पर उठाए सवाल

Trump Address US: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश के नाम अपने विशेष संबोधन में चीन पर 22 करोड़ वोटरों का डेटा चुराने का बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने चुनाव सुरक्षा के लिए कड़े नियम मांगे।

  • Written By: प्रिया सिंह
Updated On: Jul 17, 2026 | 10:22 AM

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (सोर्स-सोशल मीडिया)

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Trump Address US Elections: अमेरिकी राजनीति में फिर से एक बहुत बड़ा भूचाल आ गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र के नाम अपने विशेष संबोधन में कई गंभीर और बड़े खुलासे किए हैं। उन्होंने सीधे तौर पर चीन पर 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं का महत्वपूर्ण डेटा चुराने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिकी खुफिया एजेंसियों जैसे FBI और CIA पर भी कई बड़े सवाल खड़े किए हैं।

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने इस अहम संबोधन में अर्थव्यवस्था, सीमा सुरक्षा और विदेशी नीति पर भी चर्चा की। उनका दावा है कि साल 2020 के चुनावों में चीन ने बड़े स्तर पर अमेरिकी चुनावों को प्रभावित किया था। ट्रंप ने कहा कि होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की समीक्षा में 2.78 लाख गैर-अमेरिकी मतदाता पंजीकृत मिले। इसके अलावा उन्होंने चुनाव व्यवस्था में तत्काल भारी सुधार के लिए सेफ अमेरिका एक्ट की मांग भी की है।

चीन पर डेटा चोरी का आरोप

ट्रंप ने खुलासा किया कि साल 2020 के दौरान चीन ने 22 करोड़ वोटरों का संवेदनशील डेटा अवैध रूप से हासिल किया। इस महत्वपूर्ण डेटा में वोटरों के नाम, घर के पते, फोन नंबर और राजनीतिक पसंद जैसी अहम जानकारी शामिल थी। यह अमेरिकी चुनावी सुरक्षा के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी और खतरनाक डेटा चोरी मानी जा रही है। चीन ने कथित तौर पर इस डेटा के इस्तेमाल के लिए अपनी एक विशेष इकाई भी बनाई थी।

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खुफिया एजेंसियों पर भड़के ट्रंप

राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी दावा किया कि खुफिया एजेंसियों ने चीन के हस्तक्षेप की जानकारी उनसे पूरी तरह छिपाई। उन्होंने बताया कि 18 राज्यों के करोड़ों वोटरों का रजिस्ट्रेशन डेटा खरीदा, चुराया या फिर हैक किया गया था। उनके मुताबिक FBI और CIA ने जो बाइडेन के पक्ष में फर्जी मतपत्र तैयार कराने की जानकारी भी दबा दी। यह जानकारी देश के राष्ट्रपति, कांग्रेस और आम अमेरिकी जनता से जानबूझकर गुप्त रखी गई थी।

चुनावी सुरक्षा और वोटिंग मशीन

ट्रंप ने चुनाव में इस्तेमाल होने वाली इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों पर भी गंभीर सवाल और आपत्तियां जताई हैं। उन्होंने कहा कि ये मशीनें और मतगणना प्रणाली बहुत ही गंभीर साइबर खतरों के प्रति काफी संवेदनशील हैं। रूस, चीन, ईरान और उत्तर कोरिया जैसे कई बड़े देश अमेरिकी चुनावी ढांचे को निशाना बनाने की पूरी क्षमता रखते हैं। बिना वोटर आईडी और डाक से भेजे गए मतपत्रों के कारण इस चुनाव प्रणाली पर भरोसा करना बेहद मुश्किल है।

आर्थिक और सीमा सुरक्षा के दावे

चुनाव के अलावा ट्रंप ने बताया कि अमेरिका की सीमाएं अब देश के इतिहास में सबसे अधिक सुरक्षित हो गई हैं। उनके अनुसार पिछले 14 महीनों में एक भी अवैध प्रवासी को अमेरिका में बिल्कुल प्रवेश नहीं दिया गया है। देश में अपराध तेजी से घटा है और हत्या की दर पिछले 125 वर्षों में अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि उनकी नीतियों के कारण स्वास्थ्य सेवाओं और दवाओं की कीमतें 90 फीसदी तक घटी हैं।

मीडिया और वामपंथियों पर निशाना

ट्रंप ने आरोप लगाया कि कुछ प्रमुख अमेरिकी मीडिया संस्थानों ने उनके इस अहम संबोधन का लाइव प्रसारण नहीं किया। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि वे चुनाव व्यवस्था की इन बड़ी खामियों को देश के सामने बिल्कुल नहीं आने देना चाहते। मीडिया का एक वर्ग चुनावी धांधली को छिपाने और रैडिकल लेफ्ट की रक्षा करने की लगातार कोशिश कर रहा है। चीन की सरकार ने उनके खिलाफ खबरें लिखने वाले पत्रकारों को पैसे देने की भी भरपूर कोशिश की थी।

यह भी पढ़ें: ट्रंप के सिर पर 10 मिलियन डॉलर का इनाम, इराकी संगठन का खौफनाक ऐलान; सुलेमानी की मौत का बदला लेगा इराक?

ईरान और वेनेजुएला पर बयान

विदेश नीति पर बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला अब अमेरिका के साथ लाखों बैरल तेल उत्पादन में जुटा है। उन्होंने ईरान को लेकर भी कहा कि वहां अमेरिका को बहुत ही बड़ी और अहम सफलता लगातार हासिल हो रही है। बहुत जल्द पूरी दुनिया को अमेरिकी सेना की इन सभी कोशिशों और अभियानों के बड़े नतीजे देखने को मिलेंगे। ट्रंप ने साफ किया कि उन्होंने FBI और CIA को इन सभी मामलों की कड़ी जांच करने के सख्त निर्देश दिए हैं।

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Published On: Jul 17, 2026 | 10:21 AM

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